फौजी तैयार करने वाले मैदान पर सूख रहे कंडे

सीहोर। गांव के जिस मैदान ने एक दो नहीं पूरे एक दर्जन युवाओं को देश की सेवा करने के लिए तैयार किया अब उस पर गांव वालों के कंडे सूख रहे हैं तो भूसे के ढेर लगाकर मैदान पर अतिक्रमण किया जा चुका है. ऐसे में सेना में जाने की ललक रखने वाले गांव के युवाओं को रनिंग के लिए हाईवे पर दौडऩे को मजबूर होना पड़ रहा है. जिससे हादसों का अंदेशा बना रहता है. गांव के जिम्मेदार विवाद से बचने के लिए खेल मैदान को अतिक्रमण की भेंट चढ़ता देख मूकदर्शक बने हुए हैं.

जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम जताखेड़ा गांव के लगभग 12 युवा वर्तमान में देश की सेना में शामिल होकर विभिन्न स्थानों पर पदस्थ हैं. इन युवाओं ने सेना में जाने के लिए अपने गांव के ही खेल मैदान पर तैयारी की थी. दौडऩे से लेकर पीटी और अन्य शाररिक अभ्यास के बूते उनका चयन भारतीय सेना में हुआ है. उनकी देखा देखी गांव के अन्य युवा भी सेना में जाना चाहते हैं, लेकिन उसके लिए तैयारी करने में खुद को अक्षम महसूस कर रहे हैं, क्योंकि गांव के खेल मैदान पर कतिपय ग्रामीणों द्वारा कब्जा किया जा चुका है. अब वह मैदान पर कंडे थोपते हैं तो वहीं पर भूसे व लकड़ी के अलावा अन्य अनुपयोगी सामान को रखते हैं. ऐसे में ढाई एकड़ का मैदान का अधिकांश हिस्सा अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है. नतीजतन ग्रामीण युवाओं को या तो मन मसोसकर रहना पड़ रहा है या फिर भोपाल- इंदौर हाईवे पर तेज रफ्तार भागते वाहनों के बीच जान का जोखिम उठाते हुए दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है.

ग्राम के एक युवक अशोक वर्मा ने चर्चा में बताया कि खेल मैदान पर जगह नहीं मिलने के कारण वह जताखेड़ा- सुकलिया मार्ग पर दौड़ लगाते हैं, लेकिन वहां से गुजरते तेज रफ्तार वाहनों के कारण अक्सर हादसे होने का अंदेशा बना रहता है. ऐसी ही स्थिति भोपाल- इंदौर हाईवे की है. अब आखिर वह कहां जाकर रनिंग करें ताकि उनका चयन सेना में हो सके. यही पशोपेश के हालात अन्य युवाओं के हैं.

लगभग ढाई एकड़ का है खेल मैदान

गांव के युवाओं की मानें तो गांव की ढाई एकड़ जमीन का खेल मैदान के लिए सीमांकन हो चुका है. ग्राम पंचायत के दस्तावेजों में भी यह मैदान खेल के लिए आरक्षित है, लेकिन गांव के कुछ दबंग व रसूखदारों के कब्जों के कारण खेल मैदान अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है. ग्राम पंचायत द्वारा इन ग्रामीणों से अपने लकड़ी, कंडे व भूसा आदि हटाने को कई बार कहा जा चुका है, लेकिन रसूख के चलते वह अपना सामान नहीं हटा रहे. ऐसे में पूरा खेल मैदान अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है.

पूर्व में घटित हादसों को देख चिंतित रहते परिजन

सेना और पुलिस में जाने के लिए ग्रामीण युवाओं में गजब उत्साह रहता है. यही कारण है कि ग्राम जताखेड़ा के काफी युवा भारतीय सेना में पदस्थ हैं तो कई पुलिस विभाग में भी अपने सेवा दे रहे हैं. ऐसे में उनसे प्रेरित युवाओं को जब रनिंग व अन्य एक्सरसाईज के लिए खेल मैदान पर जगह नहीं मिलती तो वह भोपाल- इंदौर हाईवे पर रनिंग करते हैं. गौरतलब है कि इस मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों के कारण गंभीर सड़क हादसे हो चुके हैं. गुड़भेला, जताखेड़ा, सोंडा व अमलाहा आदि गांवों के युवाओं के साथ रनिंग के दौरान हुए हादसों को देखते हुए परिजन काफी चिंतित रहते हैं तथा वह उन्हें हाईवे पर दौडऩे से मना करते हैं.

कब्जा हटाने के लिए दिए नोटिस

गांव की कुछ महिलाओं द्वारा शासकीय खेल मैदान पर कंडे बनाकर सूखने रखे हैं तो कुछ ने वहां पर भूसा और लकड़ी रख दी है. उनसे कई बार सामान हटाने का कहा गया है, लेकिन जब वह नहीं सुन रहे तो अब पांच ग्रामीणों को नोटिस दिए गए हैं. आजकल में उनका सामान हटा दिया जाएगा.

धर्मसिंह,

सचिव, ग्राम पंचायत

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