एमएनएस अधिकारियों को भी अन्य पूर्व सैनिकों की तरह मिलेगा आरक्षण का लाभ

नयी दिल्ली 10 फरवरी (वार्ता) सरकार ने मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (एमएनएस) के अधिकारियों को सेवा निवृत होने के बाद केंद्रीय सिविल सेवाओं एवं अन्य पदों पर दोबारा नियुक्ति के संदर्भ में संदेह को दूर करते हुए कहा है कि इन अधिकारियों को भी सेना, नौसेना और वायु सेना के अन्य पूर्व सैनिकों की तरह दोबारा किसी पद पर नियुक्ति के लिए आरक्षण तथा आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि इस संदेह को दूर करने के लिए पूर्व सैनिकों के पुनर्नियोजन के संबंध में सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 309 के अंतर्गत पूर्व-सैनिक (केंद्रीय सिविल सेवाओं एवं पदों में पुनर्नियोजन) संशोधन नियम, 2026 अधिसूचित किया है।

इस संशोधन के तहत नियम 2(ग) (i) में परिवर्तन करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय संघ की नियमित थल सेना, नौसेना, वायु सेना के साथ-साथ मिलिट्री नर्सिंग सर्विस एमएनएस, में किसी भी रैंक में (चाहे वह लड़ाकू हो या गैर-लड़ाकू) सेवा देने वाले सभी कर्मी पूर्व-सैनिक की परिभाषा में शामिल होंगे ताकि उन्हें केंद्रीय सिविल सेवाओं में पुनर्नियोजन का लाभ मिल सके। मंत्रालय ने कहा है कि इस संशोधन से सभी संदेह दूर हो जायेंगे। संशोधन से पहले यह स्पष्ट नहीं था कि एमएनएस अधिकारी जो कमीशन अधिकारी होते हैं वह अन्य पूर्व-सैनिकों की तरह पुनर्नियोजन लाभों के पात्र हैं या नहीं। अब यह संशोधन औपचारिक रूप से एमएनएस कर्मियों को पुनर्नियोजन नियमों के अंतर्गत मान्यता देता है और रक्षा सेवाओं से सेवानिवृत्त अधिक व्यापक वर्ग के लिए पुनर्वास एवं दूसरे करियर के अवसरों को सुदृढ़ करता है।

अधिसूचना के नियम 2, खंड (ग) में संशोधन के अनुसार, पूर्व-सैनिक की परिभाषा में अब स्पष्ट रूप से भारतीय संघ की सैन्य नर्सिंग सेवा को नियमित थल सेना, नौसेना और वायु सेना के साथ सूचीबद्ध किया गया है। यह नियम उन सभी व्यक्तियों पर लागू होगा जिन्होंने किसी भी रैंक में, चाहे वे लड़ाकू हों या गैर-लड़ाकू, सेवा दी हो। यह संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इस संशोधन से एमएनएस कर्मियों को केंद्र सरकार के समूह ‘सी’ पदों में 10 प्रतिशत और समूह ‘डी’ पदों में 20 प्रतिशत मिलेगा। इसके अलावा नागरिक सेवाओं में भर्ती के लिए वास्तविक आयु से सैन्य सेवा की अवधि में 3 वर्ष की छूट मिलेगी । साथ ही इन कर्मियों को संघ लोक सेवा आयोग एवं कर्मचारी चयन आयोग की भर्तियों में अन्य पूर्व-सैनिकों के समान दर्जा दिया जायेगा।

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