
नयी दिल्ली, 10 फरवरी (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ में सात से नौ फरवरी तक आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव ‘बस्तर पंडुम’ के सफल आयोजन की सराहना की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस कार्यक्रम से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी और भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में ऐसी पहलों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसने बस्तर क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक, पारंपरिक और आदिवासी विरासत को प्रदर्शित किया और क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव को प्रतिबिंबित किया।
श्री मोदी ने कहा, “सात से नौ फरवरी के बीच छत्तीसगढ़ में ‘बस्तर पंडुम’ नामक एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस उत्सव के दौरान, बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और आदिवासी विरासत को भव्य तरीके से प्रदर्शित किया गया।” उन्होंने कहा कि समुदाय-संचालित सांस्कृतिक मंच केवल उत्सव मनाने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, “ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” उन्होंने क्षेत्र की बदलती छवि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बस्तर कभी मुख्य रूप से माओवाद, हिंसा और पिछड़ेपन से जुड़ा था, लेकिन हाल के वर्षों में स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।
श्री मोदी ने कहा, “पहले जब बस्तर का जिक्र होता था, तो माओवाद, हिंसा और पिछड़ेपन की याद आती थी लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है।” उन्होंने कहा कि आज बस्तर को विकास की पहलों और वहां के लोगों के बीच बढ़ते आत्मविश्वास के लिए तेजी से पहचाना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र के भविष्य के प्रति आशावाद व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बस्तर शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव के पथ पर आगे बढ़ता रहेगा। उन्होंने कहा, “मेरी सच्ची आशा है कि इस क्षेत्र के लिए आने वाला समय शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव की भावना से भरा हो।” ‘बस्तर पंडुम’ एक सांस्कृतिक उत्सव है जिसका उद्देश्य बस्तर की स्वदेशी परंपराओं, आदिवासी कला रूपों, लोक संगीत, नृत्य, व्यंजन और रीति-रिवाजों का जश्न मनाना है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में आदिवासी विरासत, पर्यटन और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
