
जावरा । नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र में इन दिनों 10, 20 के नोटो के साथ 5, 10, 20 रुपये के सिक्कों की किल्लत महसूस हो रही है। जिसका मुख्य कारण बैंकों द्वारा उपभोक्ताओं की इस समस्या का निराकरण नहीं किया जाना है। छोटे नोटो व सिक्को की किल्लत के कारण ग्राहक और व्यापारी दोनों परेशान हो रहे हैं। उपभोक्ताओं को बैंकों द्वारा स्पष्ट मना कर दिया जाता है कि, अधिकारियों का जवाब रहता है कि जब तक रिजर्व बैंक से हमारे पास सिक्के और नोट नहीं आएंगे, तब तक हम नहीं दे पाएंगे। जानकारी के अनुसार रिजर्व बैंक द्वारा भारतीय स्टेट बैंक को पिछले डेढ़ वर्षों से पांच, 10 के सिक्के तथा 10 और 20 के नोट नहीं दिए जा रहे हैं। इसके कारण बैंक भी उपभोक्ताओं को उक्त सिक्के तथा नोट देने में असमर्थतथा व्यक्त कर रहे हैं। बाजार से धीरे-धीरे सिक्के और नोट गायब होते जा रहे हैं और परेशानी बढ़ती जा रही है। शादी-ब्याह का मौसम चल रहा है। लोग 10 और 20 के नोट की फ्रेश गड्डी लेने के लिए भटक रहे हैं। मजबूरी में कटे-फटे पुराने नोट बाजार में व्यापारियों को लेना पड़ रहे हैं।
नहीं मिल रहे फ्रेश नोट: 10 व 20 के नोट नहीं आ रहे हैं। जिनके पास पुराने नोट है, वही बाजार में दिख रहे हैं। नए व फ्रेश नोट गत डेढ़-दो वर्षों से नहीं चलन में रहे हैं। पांच व 10 रुपये के सिक्कों का बाजार में अभाव होने लगा है। सिक्कों की किल्लत बढ़ती जा रही है। सैलून व्यवसायी गोपाल सेन, परमार ने बताया कि बाजार में खुले रुपये आसानी से नहीं मिल पा रहे हैं। मिल भी रहे तो वह कटे-फटे पुराने नोट मिल रहे हैं। गत डेढ़ वर्षों से 10, 20 रुपये के नए नोट तथा पांच, 10 रुपये के सिक्के रिजर्व बैंक द्वारा नहीं दिए जा रहे हैं। इसके कारण हम उपभोक्ताओं को नहीं दे पा रहे हैं।
एक व 2 के सिक्के के लिए बनता है दबाव
शहर के होटल संचालक बताते है कि स्टेट बैंक में चिल्लर लेने के लिए जब गए तो 10 के सिक्कों के साथ एक व दो रुपए के सिक्कों का दबाव बनाया। 1 व 2 के सिक्के नहीं लेने पर 10 व 5 के सिक्के मुझको नहीं दिए गए। ग्राहकों से रोज होता है हमारा विवाद खुल्ले पैसों को लेकर दुकान पर आए ग्राहकों से कहासुनी होती है। हम होटल चला रहे है। 10 की कचोरी या समोसा हम लोग देते हैं तो ग्राहक 500 का नोट देते हैं जिनके खुल्ले तो हम कर देते हैं परंतु कई बार 10 व 5 के सिक्कों की किल्लत होती है इस वजह से काफी परेशानियां हो रही है। दुकान पर सुबह के समय सब्जी लेने आने वाले ग्राहक को खुल्ले पैसे नहीं होने से सामान देने के लिए मना करना पड़ता है क्योंकि खुले पैसे सुबह-सुबह नहीं मिल पाते हैं। बैंकों के चक्कर लगाने के बाद भी हमें चिल्लर उपलब्ध नहीं हो रही है। बैंकों को 10 और 5 के सिक्के बांटने के लिए एक अलग से काउंटर लगाना चाहिए ताकि सुविधा मिल सके।
