वैश्विक चंद्र कालक्रम: चंद्रमा के सुदूर हिस्से से मिले प्रमाणों ने दी नयी वैज्ञानिक दिशा

बीजिंग, फरवरी (वार्ता) वैज्ञानिकों ने पहली बार इस बात की पुष्टि की है कि चंद्रमा के निकटवर्ती और सुदूर हिस्सों पर क्रेटर बनने की दर अनिवार्य रूप से एक समान है। यह खोज विश्व स्तर पर एकीकृत चंद्र कालक्रम प्रणाली की स्थापना के लिए एक ठोस आधार प्रदान करती है। ‘साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेली’ के अनुसार, चीनी विज्ञान अकादमी के भू-विज्ञान एवं भू-भौतिकी संस्थान के नेतृत्व में अनुसंधान टीम ने रिमोट सेंसिंग तस्वीरों का विश्लेषण कर दशकों पुराने चंद्र प्रभाव क्रेटर कालक्रम नमूने को सफलतापूर्वक संशोधित किया है। उनका यह अध्ययन दोनों गोलार्द्धों में समान प्रभाव प्रवाह का खुलासा करता है। यह इस बात का प्रमाण है कि शुरुआती चंद्र प्रभाव की घटनाएं धीरे-धीरे कम होने के सहज रुझान का पालन करती हैं, न कि उन नाटकीय उतार-चढ़ाव जैसा पहले अनुमान लगाया गया था। उनके निष्कर्ष गुरुवार को ‘साइंस एडवांसेज’ में प्रकाशित हुए।

चंद्रमा की सतह की उम्र जानना उसके भू-वैज्ञानिक विकास को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।दशकों से वैज्ञानिक प्रभाव क्रेटरों की गणना कर उन क्षेत्रों की आयु का अनुमान लगाते रहे हैं, जहां से नमूने नहीं लिये गये हैं। इसमें क्रेटरों का अधिक घनत्व पुरानी सतह का संकेत देता है। क्रेटर कालक्रम की वर्तमान पद्धति पूरी तरह से चंद्रमा के निकटवर्ती हिस्से से लिये गये नमूनों पर निर्भर थी और सबसे पुराने नमूने चार अरब वर्ष से अधिक के नहीं हैं। इस सीमा ने चंद्रमा के प्रारंभिक प्रभाव इतिहास के बारे में चल रही बहस को जन्म दिया था, जिसमें ‘लेट हैवी बॉम्बार्डमेंट’ जैसी अलग-अलग परिकल्पनाएं शामिल थीं।

जून 2024 में एक बड़ी सफलता तब मिली, जब चीन के ‘चांग ई-6 अभियान अपोलो बेसिन से 1,935 ग्राम चंद्र नमूने वापस लाया। यह बेसिन चंद्रमा के सुदूर हिस्से पर स्थित ‘साउथ पोल-ऐटकेन’ बेसिन के भीतर मौजूद है। इन नमूनों के विश्लेषण से दो प्रमुख प्रकार की चट्टानों की पहचान हुई। पहली 2.807 अरब वर्ष पुरानी ‘यंग बसाल्ट’ और दूसरी 4.25 अरब वर्ष पहले बनी ‘एनसिएंट नोराइट’। विशेष रूप से नोराइट उस मैग्मा से जन्मा था, जो ‘साउथ पोल-ऐटकेन बेसिन’ बनाने वाली विशाल प्रभाव घटना के बाद जम गया था। यह चंद्रमा की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी प्रभाव संरचना है। इन नमूनों ने चंद्रमा के प्रारंभिक इतिहास को फिर से व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण आधार का काम किया है। शोधकर्ताओं ने उच्च-रिजॉल्यूशन वाली रिमोट सेंसिंग इमेजरी का उपयोग कर चांग ई-6 के लैंडिंग क्षेत्र और व्यापक साउथ पोल-ऐटकेन बेसिन में क्रेटर घनत्व का व्यवस्थित रूप से मानचित्रण किया। इसके बाद इस नये घनत्व डाटा को अपोलो, लूना और चांग ई-5 मिशनों के सभी ऐतिहासिक नमूनों के डाटा के साथ मिला कर उन्होंने एक नया और अधिक व्यापक चंद्र प्रभाव कालक्रम नमूना तैयार किया।

उनके परिणाम बताते हैं कि चंद्रमा के सुदूर हिस्से के क्रेटर घनत्व का डाटा निकटवर्ती हिस्से से तैयार किये गये नमूने के ‘कॉन्फिडेंस इंटरवल’ के साथ पूरी तरह मेल खाता है। इस अध्ययन के मुख्य लेखक और संस्थान के शोधकर्ता यू जोंग्यू ने कहा, “इससे पता चलता है कि पूरे चंद्र पर प्रभाव प्रवाह एक समान था, जिससे दुनिया भर में चांद की एक जैसी कालक्रम के लिए एक भरोसेमंद आधार मिलता है।” श्री यू ने उल्लेख किया कि यह अध्ययन चंद्रमा के प्रभाव इतिहास के बारे में हमारी समझ को मौलिक रूप से आगे बढ़ाता है और चांग ई-6 नमूनों के महत्वपूर्ण वैज्ञानिक मूल्य का उल्लेख करता है। यह संशोधित कालक्रम न केवल चंद्र अध्ययन के लिए, बल्कि सौर मंडल के अन्य ग्रहों की सतहों के आयु निर्धारण के लिए भी एक अधिक सटीक संदर्भ के रूप में कार्य करेगा।

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