सतना : एक ओर जहां जिले की मझगवां थाना पुलिस द्वारा पूर्व दस्यु व दुर्दांत अपराधी को देशी कट्टा और कारतूस के साथ गिरफ्तार करने का दावा किया गया. वहीं दूसरी ओर परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस उनके बेटे को गिरफ्तार कर बार बार डकैत बनाने पर तुली हुई है. दस मामले के सामने आने से एक बार फिर से एडी एक्ट के दुरुपयोग किए जाने को लेकर नई बहस छिड़ गई है.
मझगवां थाना प्रभारी आदित्य नाराया धुर्वे से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस को इस बात की सूचना मिली थी कि दुर्दांत अपराधी प्रमोद उर्फ नीलेश पिता सौखीलाल निवासी चंदई, बुंदेलापुर मोड़ के निकट कट्टा कारतूस लेकर घूम रहा है. जिसे गंभीरता से लेते हुए मझगवां और जैतवारा थाने पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया. जांच किए जाने पर आरोपी के पास से 12 बोर का लोडेड देशी कट्टा, एक जिंदा कारतूस मिला. जिसे देखते हुए आरोपी के विरुद्ध 25/27 आम्र्स एक्ट और 11/13 मप्र डकैत एवं ब्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की गई. पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध जैतवारा थाने में बीएनएस की 4 धाराओं में प्रकरण दर्ज हैं. जिसमें वह फरार चल रहा था. प्रकरण दर्ज कर आरोपी को सलाखों के पीछे भेजे जाने की जानकारी सामने आते ही आरोपी के परिजनों द्वारा पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाने शुरु कर दिए.
जेल से छूटते ही फंसा दिया
बेटे की गिरफ्तारी और उसके विरुद्ध एडी एक्ट लगाए जाने की जानकारी सामने आते ही परिजन व्यथित हो गए. आरोपी प्रमोद के माता पिता का कहना है कि कुछ दिन पहले ही जैतवारा थाने में हुई शिकायत के आधार पर उनकी स्कार्पियो गाड़ी को पुलिस ने जब्त कर लिया था. वहीं जब बेटा सजा काटकर बाहर आया तो पुलिस ने फिर से एडी एक्ट लगाकर उसे सलाखों के पीछे भेज दिया. कुछ स्थानीय राजनैतिक दबाव के चलते पुलिस उनके बेटे को बार बार डकैत बनाने पर तुली हुई है. इसी कड़ी में परिजनों ने सवाल उठाया कि सजा काट चुके व्यक्ति को जीवन भर अपराधी बनाकर रखना, क्या यही पुलिस का कानून है. परिजनों द्वारा इस मामले में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है
