भंडारा/दिल्ली | भंडारा-गोंदिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. प्रशांत यादवरावजी पडोले ने आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के नाम को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री को पत्र लिखकर फिल्म के शीर्षक और इसकी विषयवस्तु पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। सांसद का तर्क है कि ‘पंडित’ शब्द भारतीय संस्कृति में विद्वत्ता, सम्मान और संस्कारों का प्रतीक है। ऐसे पवित्र शब्द के साथ ‘घूसखोर’ जैसे अपमानजनक विशेषण का प्रयोग करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह एक विशिष्ट समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाने और उनकी छवि खराब करने वाला कृत्य है।
डॉ. पडोले ने अपने पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी समुदाय की गरिमा से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस तरह के विवादित शीर्षक समाज में नफरत और अविश्वास पैदा करते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका बनी रहती है। सांसद के अनुसार, फिल्म जगत को रचनात्मकता दिखाते समय सामाजिक मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि जब तक फिल्म के नाम और सामग्री में उचित बदलाव नहीं किए जाते, तब तक इसके किसी भी तरह के प्रदर्शन या प्रचार-प्रसार पर पूर्ण रोक लगाई जानी चाहिए।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सांसद ने पत्र की प्रतियां केंद्रीय गृह मंत्री, सेंसर बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को भी भेजी हैं। उन्होंने मांग की है कि भविष्य में फिल्मों के शीर्षकों को लेकर सरकार सख्त दिशा-निर्देश जारी करे ताकि किसी भी जाति या वर्ग का अपमान न हो। डॉ. पडोले ने विश्वास जताया है कि सरकार इस मामले का संज्ञान लेकर शीघ्र ठोस कदम उठाएगी। फिलहाल, फिल्म के निर्माताओं की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस विरोध ने फिल्म की रिलीज से पहले ही मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

