इल्म को लिबास बनाओ: सैय्यद हसन असकरी 

जबलपुर। मंडी मदार टेकरी स्थित इस्लामी शिक्षा केंद्र दारुल उलूम अहले सुन्नत में मंगलवार रात 53वां वार्षिक दीक्षांत समारोह (जश्ने दस्तारबंदी) संपन्न हुआ। शबे-बारात के मौके पर 28 छात्रों को सनद और दस्तार पहनाकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की सरपरस्ती फाजि़ले बगदाद व जानशीन मोहद्दिस-ए-आज़म अमीरे मिल्लत व सूफीये हिन्द हज़रत अल्लामा सैय्यद हसन असकरी मियां ने की। मुंबई से जानशींने बाबा-ए-मिल्लत हज़रत सूफी फारुख़ लकड़वाला और हज़रत सैय्यद मुहियुद्दीन अशरफ की इनायत से निज़ामत की जिम्मेदारी हज़रत अल्लामा सैय्यद अबरार अशरफी आनन्द (गुजरात) ने संभाली। हुजूर बाबा ऐ मिल्लत र.अ.गुल बाबा हुजूर की रूहानी से लबरेज जलसे में

सैय्यद हसन असकरी मियां ने अपनी तकरीर में मुख्य रूप से कहा कि इल्म से अपना जीवन रोशन करो।इल्म को अपना लिबास बना लो। दुनिया और आख़िरत में कामयाबी सिर्फ इल्म और उस पर अमल करने से मिलेगी। मुसलमानों के लिए दीनी तालीम के साथ-साथ दुनिया तालीम हासिल करना बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम में रहबरे शरीयत हाफिज़ पीर नवाज़ पूना, हज़रत अल्लामा अली हसन चित्रकूट, और ख़तीब-ए-महाराष्ट्र हाफिज़ पीर नवाज़ साहब नूरानी ने भी नूरानी तकरीरें पेश कीं। सैय्यद नौशाद अशरफ, शाहिर अशरफी लहसुई और मो. सिराज अशरफी किछौछवी ने नात-ए-पाक पढ़ा।समारोह के अंत में मुल्क की तरक्की और खुशहाली के लिए दुआ की गई।

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