
जबलपुर। हाईकोर्ट ने अपने अहम आदेश में कहा है कि कानूनी अधिकार के तहत सक्षम प्राधिकरण के समक्ष आपराधिक शिकायत करना अवमानना की श्रेणी में नहीं आता है। हाईकोर्ट जस्टिस बी पी शर्मा ने अपने आदेश में कहा है कि यह धारा 498 अपवाद 8 के सुरक्षा कवच के अंदर आता है। एकलपीठ ने भोपाल न्यायालय द्वारा मानहानि तहत धारा 500 के तहत प्रारंभ की गयी अपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के आदेश जारी किये है।
भोपाल निवासी सैयद राशिद अली की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि शादी के बाद उसका पत्नी से झगडा हो गया था। पत्नी के शिकायत पर उसके खिलाफ धारा 498 ए के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। न्यायालय ने उसे एक साल की सजा से दंडित किया था। जिसके खिलाफ उसने अपील दायर की थी और अपीलीय न्यायालय ने उसे दोषमुक्त कर दिया था। दोषमुक्ति के खिलाफ अनावेदिका ने हाईकोर्ट के अपील की है,जो लंबित है।
शिकायतकर्ता अनावेदिका का कहना है कि धारा 498 ए के तहत प्रकरण दर्ज करवाने के बाद आवेदक ने मुस्लिम कानून के तहत लिखित तलाक-ए-बैन दिया। इसके बाद आवेदन ने शिकायतकर्ता तलाकशुदा पत्नी तथा उसके रिश्तेदारों के खिलाफ धारा खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 477, 494 और 149 के तहत अपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। जिसकी सुनवाई करते हुए न्यायालय ने 14 अक्टूबर 2023 को उसकी तलाकशुदा पत्नी व अन्य को दोषमुक्त कर दिया था।
तलाकशुदा पत्नी ने उसके खिलाफ धारा 499 और 500 के तहत यह शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उसके तथा रिष्तेदारों के खिलाफ झूठे और मनगढ़ंत आरोपों लगाते हुए अपराधिक कार्यवाही प्रारंभ की थी,जिसके उसके मानसिक तकलीफ हो। इसके अलावा समाज में उसकी बदनामी करना और लंबित अपराधिक प्रकरण वापस लेने के दवाब बनाना है। तलाकशुदा पत्नी की शिकायत पर भोपाल जिला न्यायालय के जेएफएमसी ने उसके खिलाफ धारा 500 के तहत अपराधिक कार्यवाही प्रारंभ करने के निर्देश जारी किये है, जिसमे सजा का प्रावधान है।
याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि उसने आपराधिक शिकायत कानूनी अधिकार रखने वाली प्राधिकरण के समक्ष की थी। धारा 499 के सेक्शन 8 के तहत कानूनी अधिकार रखने वाले किसी व्यक्ति के द्वारा अच्छी नीयत से आपराधिक शिकायत में आरोप लगाना मानहानि नहीं है। एकलपीठ ने मामला धारा 499 के सेक्शन 8 के तहत आता है, इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ मानहानि का कोई अपराध नहीं बनता है। याचिकाकर्ता के खिलाफ धारा 500 के तहत भोपाल की अदालत में चल रही आपराधिक कार्रवाई को रद्द किया जाता है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अमानुल्ला ने पैरवी की।
