वाशिंगटन | दूसरी बार अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की निजी संपत्ति में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। हाल ही में उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप की डॉक्यूमेंट्री के लिए अमेज़न ने करीब ₹256 करोड़ का भुगतान किया है, जिसे विशेषज्ञ जेफ बेजोस की ‘एंटी-ट्रस्ट’ कानूनों से बचने की रणनीति मान रहे हैं। इसके अलावा, मेटा, यूट्यूब और पैरामाउंट जैसी दिग्गज कंपनियों ने ट्रंप के खिलाफ चल रहे कानूनी मुकदमों में अदालती कार्रवाई के बजाय करोड़ों रुपये का समझौता (Setllement) करना बेहतर समझा। केवल इन कानूनी समझौतों से ही ट्रंप ने ₹823 करोड़ से अधिक की कमाई कर ली है, जिसे ‘बदले की राजनीति’ से बचने का कॉरपोरेट तरीका कहा जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप परिवार की आमदनी का सबसे बड़ा जरिया ‘क्रिप्टो करेंसी’ बनकर उभरा है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी प्रोजेक्ट्स से ₹7,029 करोड़ कमाए हैं। आरोप लग रहे हैं कि सरकार की नीतियों को प्रभावित करने की इच्छा रखने वाले लोग ट्रंप परिवार के ‘कॉइन्स’ खरीदकर गुप्त तरीके से पैसा ट्रांसफर कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की एक कंपनी के साथ ₹18,000 करोड़ की डील के महज दो सप्ताह बाद ही राष्ट्रपति ने यूएई को एडवांस्ड कंप्यूटर चिप्स देने का फैसला किया। यह कूटनीति और निजी व्यापार के बीच की धुंधली रेखा को उजागर करता है।
ट्रंप की आय का एक और विवादास्पद हिस्सा कतर से मिला ‘बोइंग 747’ जेट विमान है, जिसकी कीमत करीब ₹3,660 करोड़ है। हालांकि इसे आधिकारिक तौर पर सरकार को दिया गया था, लेकिन ट्रंप इसे राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद अपने साथ ले जाने पर विचार कर रहे हैं। पिछले एक साल में उनकी कुल कमाई ₹12,000 करोड़ के पार पहुंच गई है, जो अमेरिका के एक औसत मध्यमवर्गीय परिवार की आय से 16,000 गुना अधिक है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप ‘देश पहले’ के बजाय ‘फैमिली फर्स्ट’ के फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं, जो सार्वजनिक रिकॉर्ड के आधार पर अब तक की न्यूनतम अनुमानित आय है।

