
मक्सी। सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं. यह पंक्ति मक्सी दंगा पीडि़त जोएब के जीवन संघर्ष और न्याय की लड़ाई को बखूबी बयां करती है. 25 सितंबर 2024 को मक्सी में हुए सांप्रदायिक दंगे को लेकर एक बार फिर बड़ा खुलासा सामने आया है. दंगे में आरोपी बनाए गए जोएब खान पिता अब्दुल सफीक खान को उच्च न्यायालय के आदेश पर की गई सीआईडी जांच में अपराध क्रमांक 368/24 में क्लीन चिट मिल गई है. सीआईडी की प्रारंभिक रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि घटना स्थल पर जोएब की मौजूदगी के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं. पीडि़त जोएब खान ने नवभारत से बातचीत में बताया कि आपसी रंजिश के चलते उनका नाम साजिशन झूठी एफआईआर में दर्ज कराया गया था.
जोएब खान के अनुसार, उन्होंने 8 जून 2024 को तत्कालीन मक्सी थाना प्रभारी भीमसिंह पटेल को लिखित आवेदन देकर अनीस मेव पिता मजीद मेव एवं उसके परिजनों से जान का खतरा और झूठे केस में फंसाने की आशंका जताई थी.जोएब का कहना है कि उसी आशंका के अनुरूप बाद में दंगे के मामले में उन्हें फंसाने की कोशिश की गई. मक्सी दंगे के मुख्य गवाह असद खान से जोएब की फोन पर बातचीत हुई थी. घटना के समय, खुद जोएब का कहना है कि मैं देवास में मौजूद था. दंगे के मुख्य गवाह असद पिता नवाब खां उर्फ गब्बर घायल से जोएब की 25 सितंबर 2024 की शाम 7.26 बजे फोन पर 3 मिनट 41 सेकंड बातचीत हुई थी. जोएब के अनुसार उस समय वे मक्सी से देवास के बीच स्वस्तिक फूड जोन पर मौजूद थे और इसके बाद रात्रि 8.14 बजे दोबारा बातचीत में असद ने जोएब को मक्सी के बल्डी मोहल्ले में हुए झगड़े और फायरिंग की जानकारी दी और बाद में असद खान ने खुद जोएब के खिलाफ झूठी गवाही देकर जोएब को शक घेरे में खड़ा कर दिया.
सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और टॉवर लोकेशन से साफ हुई स्थिति…
सीआईडी की प्राथमिक जांच में मक्सी घटनास्थल के जब्त सीसीटीवी फुटेज एवं लोगों द्वारा बनाए गए मोबाइल वीडियोज में जोएब की उपस्थिति घटना स्थल पर कहीं भी नजर नहीं आ रही है और देवास के सीसीटीवी कैमरे एवं मोबाइल की टॉवर लोकेशन में जोएब की मौजूदगी घटना के समय देवास में पाई गई, न कि मक्सी में.
