इंदौर:सानंद न्यास द्वारा जाल सभागृह में आयोजित विशेष स्वास्थ्य व्याख्यान में पुणे के सुप्रसिद्ध चिकित्सक एवं ‘दीक्षित जीवनशैली’ के प्रवर्तक डॉ. जगन्नाथ दीक्षित ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मधुमेह और मोटापा कोई अपरिवर्तनीय रोग नहीं हैं. यदि इंसुलिन को नियंत्रित कर लिया जाए तो मधुमेह को रिवर्स किया जा सकता है. इसके लिए भोजन की मात्रा कम करने की नहीं, बल्कि भोजन की आवृत्ति कम करने की आवश्यकता है.
उन्होंने कहा दिन में कम बार खाइए, लेकिन जब भी खाइए भरपेट खाइए। रोग होने पर डॉक्टर यह बता सकता है कि क्या करना है, लेकिन रोगी न बनना यह पूरी तरह व्यक्ति के अपने अनुशासन पर निर्भर करता है. डॉ. दीक्षित ने बताया कि जब शरीर में इंसुलिन संतुलन में आ जाता है, तो अनेक हार्मोन स्वतः नियंत्रित होने लगते हैं। उन्होंने अपने क्लीनिक के अनुभव साझा करते हुए कहा कि इंसुलिन नियंत्रण के बाद कई लोगों की तंबाकू जैसी बुरी आदतें भी स्वतः छूट गईं. डॉ. दीक्षित ने कहा कि मधुमेह की स्थिति जानने के लिए एचबीए1सी जांच ही सबसे सटीक और विश्वसनीय मानी जाती है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि मधुमेह को कम करना या समाप्त करना हर व्यक्ति की जीवनशैली और उसके अनुभव पर निर्भर करता है. यदि निरोगी रहना है, तो दिन में केवल दो बार भोजन करने की आदत डालनी होगी. उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान स्वयं स्वीकार करता है कि मधुमेह रिवर्सिबल हो सकता है. सानंद न्यास एवं चोइथराम चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित इस विशेष व्याख्यान में बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे. सभी ने गहन रुचि के साथ डॉ. दीक्षित के विचार सुने. कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रजनीश कुटुंबळे द्वारा किया गया. सानंद न्यास के अध्यक्ष जयंत भिसे, मानद सचिव श्री संजीव वावी कर और सहसचिव डॉ. अनंत जिंसीवाले ने अतिथियों का स्वागत किया. कार्यक्रम का सूत्रसंचालन सानंद मित्र आर्य गोरे एवं कुमारी श्रेया देशमुख ने किया।सानंद न्यास के अध्यक्ष श्री जयंत भिसे ने आभार व्यक्त किया।
