
जबलपुर। कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने पति से भरण-पोषण राशि दिलाए जाने की मांग संबंधी पत्नी का आवेदन समुचित न पाते हुए निरस्त कर दिया। अनावेदक पति सतना निवासी विक्की उर्फ विकास की ओर से कहा गया कि उनके पक्षकार का नौ फरवरी, 2029 को आवेदिका के साथ जबलपुर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह हुआ था। दांपत्य संबंधों से कोई संतान नहीं है। आवेदिका पर्याप्त रूप से संतोष जनक कारण प्रस्तुत नहीं कर सकी है, जिसके आधार पर उसे पति से प्रतिमाह भरण-पोषण राशि दिलाई जाए। जिस पर आवेदन निरस्त किए जाने योग्य है। साथ ही अनावेदक की मासिक आय इतनी नहीं है कि वह भरण- पोषण दे सके। वह स्वयं किराये के मकान में निवासरत है। उसकी आय भी कम है। इसके अलावा आवेदिका ने अपनी शिक्षण कार्य से होने वाली आमदनी का उल्लेख छिपाया है। इसलिए आवेदन दूषित होने के कारण विचारण योग्य नहीं है। अदालत ने तर्क से सहमत होकर आवेदन निरस्त कर दिया।
