विंध्य अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव: सीधी में अंतर्राष्ट्रीय आयोजन से बच्चों और युवाओं का मनोबल बढ़ा

सीधी। विंध्य अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के सीधी में अंतर्राष्ट्रीय आयोजन से बच्चों और युवाओं का मनोबल बढ़ा है। विंध्य इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के तीसरे दिन फिल्मी प्रस्तुतियों ने समां बांधा। फिल्म निर्माताओं की उत्साहपूर्ण मौजूदगी ने आयोजन को यादगार बनाया।

विंध्य इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के तीसरे दिन शनिवार को सुबह 10 बजे से फिल्मी कार्यक्रमों की भव्य शुरुआत हुई। फेस्टिवल के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों की शॉर्ट फिल्मों एवं सिनेमा प्रस्तुतियों का प्रदर्शन किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। सिनेप्रेमियों, कलाकारों और फिल्म निर्माताओं की उत्साहपूर्ण मौजूदगी ने आयोजन को और भी यादगार बना दिया। कार्यक्रम के दौरान देश-विदेश से आए डायरेक्टर्स एवं मूवी मेकर्स ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि सीधी जैसे शहर में इस स्तर का अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि इस मंच से स्थानीय बच्चों और युवाओं का मनोबल बढ़ेगा और वे भविष्य में फिल्म, सिनेमा, लेखन और रचनात्मक क्षेत्रों में आगे बढऩे के लिए प्रेरित होंगे। इसी क्रम में वक्ता देवयानी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि मिथोलॉजी पढऩे से न सिर्फ इतिहास और परंपराओं का ज्ञान मिलता है बल्कि यह नैतिकता, निर्णय-क्षमता और आत्मचिंतन को भी मजबूत करती है। इन कथाओं में छिपे प्रतीक और संदेश आज के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने प्राचीन समय में थे। उनके विचारों को उपस्थित दर्शकों ने सराहना के साथ सुना।

तीसरे दिन प्रदर्शित की गई शॉर्ट फिल्म बेउला दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केन्द्र रही। यह एक संवेदनशील शॉर्ट फिल्म है जो मानवीय रिश्तों, आत्म-संघर्ष और सामाजिक सच्चाइयों को बेहद सादगी और गहराई के साथ प्रस्तुत करती है। फिल्म की कहानी आम जीवन से जुड़ी परिस्थितियों पर आधारित है जहां पात्रों की भीतरी भावनाएं और उनके निर्णय कथा को प्रभावशाली ढंग से आगे बढ़ाते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका मिनिमल ट्रीटमेंट है-कम संवाद, प्रभावशाली दृश्य और स्वाभाविक अभिनय। बेउला शोर-शराबे से दूर रहकर दर्शकों को सीधे भावनाओं से जोड़ती है और सोचने का अवसर देती है। यह फिल्म यह संदेश देती है कि खामोशी भी एक भाषा होती है और कई बार छोटे से पल जिंदगी के बड़े अर्थ समझा देते हैं। फिल्म देखने के बाद इसका असर दर्शकों पर देर तक बना रहा। विंध्य इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का तीसरा दिन कला, संवेदना, संस्कृति, स्वदेशी उत्पादों और सिनेमा के विविध रंगों से सराबोर रहा। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि छोटे शहर भी बड़े सिनेमा और सांस्कृतिक संवाद के सशक्त मंच बन सकते हैं।

हस्तशिल्प व स्वदेशी उत्पादों की प्रदर्शिनी रही आकर्षण का केन्द्र

फिल्मी प्रस्तुतियों के साथ-साथ फेस्टिवल परिसर में पारम्परिक कला और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में सुपारी और मिट्टी से बने शिल्प लोगों के आकर्षण का केन्द्र रहे। यहां सुपारी से निर्मित गणेश प्रतिमा, सुपारी से बने खिलौने एवं मिट्टी से बने पारम्परिक खिलौनों को प्रदर्शित किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इसके साथ ही महुआ से बने स्वदेशी उत्पादों को प्रमोट करने के लिए भी विशेष स्टॉल लगाया गया। जहां महुआ से बने बिस्किट और लड्डू प्रदर्शित किए गए। स्थानीय उत्पादों की इस पहल को लोगों ने सराहा और इसे ग्रामीण एवं आदिवासी संस्कृति को मंच देने वाला प्रयास बताया।

तीसरे दिन प्रदर्शित की गई फिल्मों की सूची

तीसरे दिन प्रदर्शित की गई फिल्मों की सूची में स्वयं-भारत मप्र-आरपी सोनी, माइतीघर-नेपाल-मार्क गुरंग, प्रभात फेरी-भारत-महेंद्र श्रीवास, ब्यूला-भारत-बी.सुरेश कुमार, गौधर्मा- भारत मप्र-उत्सव ठाकुर, सरस के देश में-भारत-आस्था एवं दीप्ति, ओमलो-ए डेज़र्ट सोल-भारत-सोनू रणदीप चौधरी शामिल हैं।

Next Post

रेल रोको आंदोलनकारियों को भेजी जायेगी नोटिस, ग्रामीणों में आक्रोश

Sat Jan 31 , 2026
सीधी । जिले के कुसमी विकासखंड के भदौरा में 28 जनवरी 2026 को हुए रेल रोको आंदोलन के बाद अब रेलवे प्रशासन द्वारा आंदोलनकारियों को नोटिस भेजे जाने से क्षेत्रीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। आंदोलन के दौरान प्रशासन और रेलवे अधिकारियों ने मांगों को पूरा करने और आंदोलनकारियों पर […]

You May Like