
नई दिल्ली। समकालीन कला जगत की चकाचौंध और तीव्र दृश्यता के बीच सोनिका अग्रवाल ने एक ऐसी कलात्मक प्रक्रिया विकसित की है, जो स्थिरता, साधना और अंतर्मुखी खोज पर आधारित है। यही संवेदनशील यात्रा उनकी एकल प्रदर्शनी What Remains Awake: Dream, Depth, and the Fourth में प्रतिध्वनित होती है, जो 30 जनवरी से 10 फ़रवरी 2026 तक नई दिल्ली स्थित कलामकर गैलरी, बीकानेर हाउस में प्रदर्शित है।
सत्रह वर्षों से अधिक के अभ्यास वाली स्वशिक्षित कलाकार सोनिका अग्रवाल ने अपने जीवन अनुभवों और कला को अलग-अलग खांचों में नहीं बांटा। एक महिला, कलाकार और स्वतंत्र व्यक्तित्व के रूप में उनकी यात्रा अपेक्षाओं और आत्मनिर्णय के संतुलन से निर्मित है। उनके कार्य भारतीय दर्शन की चेतना-परंपरा,जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय से प्रेरित हैं, जो दार्शनिक होने के साथ-साथ गहरे निजी भावलोक की रचना करते हैं।
पारंपरिक कथात्मक या आकृतिमूलक अभिव्यक्तियों के स्थान पर अग्रवाल अमूर्तता को प्रतिरोध और आत्मचिंतन का माध्यम बनाती हैं। उनकी पेंटिंग्स, मूर्तियाँ और इंस्टॉलेशन्स व्याख्या थोपने के बजाय दर्शक को अनुभव के लिए आमंत्रित करती हैं। रंगों की सूक्ष्म परतें, जीवंत सतहें और उपस्थिति-अनुपस्थिति के बीच डोलते रूप उस अदृश्य भावनात्मक श्रम और सहनशीलता की ओर संकेत करते हैं, जिसे महिलाएँ अक्सर मौन में वहन करती हैं।
क्यूरेटर मायना मुखर्जी के मार्गदर्शन में सजी यह प्रदर्शनी अग्रवाल के कार्य को अनुभूति और गैर-पाश्चात्य ज्ञान-परंपराओं के व्यापक विमर्श में स्थापित करती है। वसना: द आर्किटेक्चर ऑफ डिज़ायर जैसी कृतियाँ मन की संरचना में आकांक्षा और स्मृति के प्रभावों को टटोलती हैं, जबकि डॉमिनेंस ओवर द साइलेंस ऑफ अहिंसा शक्ति, संवेदनशीलता और नैतिक उत्तरदायित्व पर गहन चिंतन प्रस्तुत करती है। ये रचनाएँ घोषणात्मक वक्तव्यों के बजाय ध्यानात्मक प्रतिबिंब हैं।
अग्रवाल की कला-यात्रा संस्थागत संरक्षण से अधिक निरंतर साधना से गढ़ी गई है। भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया राष्ट्रीय स्त्री शक्ति पुरस्कार और बेल्जियम के म्यूज़ियम ऑफ सेक्रेड आर्ट्स (MoSA) में उनकी कृतियों का संग्रहण, उनके कार्य की राष्ट्रीय और वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।
What Remains Awake अंततः एक शांत लेकिन सशक्त स्त्री-चेतना का प्रतिबिंब है,जो बोलने से अधिक सुनती है और दिखाने से अधिक अनुभव कराती है। यह प्रदर्शनी दर्शकों को धीमा होने, भीतर झांकने और बाहरी शोर के बावजूद जाग्रत रहने का आमंत्रण देती है,एक ऐसा क्रांतिकारी कर्म, जो आज के समय में पहले से कहीं अधिक आवश्यक प्रतीत होता है।
