
धार/ सरदारपुर । अपर सत्र न्यागयाधीश सरदारपुर जिला धार ने युवती को जिंदा जलाने के मामले में आरोपी रविल ऊर्फ रवि पिता समरिया परमार भील भीलखेड़ी तह. सरदारपुर जिला धार(म.प्र.) को धारा 302 भादवि में आजीवन कारावास एवं 1000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया ।
अधिवक्ता श्रीश दुबे ने घटना का विवरण बताया की फरियादी सूरज पिता जामसिंह बिलवाल थाना रिपोर्ट किया कि मुझे दिनांक 29,11.2023 को शाम 06.00 बजे करीबन खबर मिली की तुम्हारी भतीजी कुमारी शिवानी पिता निर्भयसिह बिलवाल सरदारपुर में जल गई है जिसको सरदारपुर अस्पताल में भर्ती करवा रखी है। सूचना मिलने पर गाँव से मैं तथा मेरे बड़े भय्या निर्भयसिह, भतीजा बन्टू भाई वर्दीचन्द व बड़े भाई मुकेश के साथ सरदारपुर अस्पताल आये देखा तो मेरी भतीजी शिवानी पुरी तरह से जल गई थी व काफी चिल्ला रही थी जिसको ईलाज के लिये धार रैफर कर दिया फिर अस्पताल से एंबुलेंस में डालकर ईलाज के लिये सरकारी अस्पताल धार ले गये हमने हमारी भतीजे से पुछा कि घटना कैसी हुई तो शिवानी ने हमको बताया कि मैं धार में पढ़ाई कर रही थी तो मुझे रवि पिता समरिया परमार भीलखेडी का धार से लेकर उसका कमरा सरदारपुर में बदनावर रोड पर विरेन्द्र कुमार जैन के मकान में लेकर आया था उसने मेरे से लड़ाई-झगड़ा किया व मेरे साथ मारपीट करके मेरे को जान से मारने की नियत से उसने मेरे ऊपर केरोसिन (घासलेट) डालकर माचिस की तिली जलाकर मेरे ऊपर आग लगा दी व बाहर से दरवाजा मे ताला लगाकर भाग गया मैं चिल्लाई तो मकान मालिक अंकल आये व उन्होंने दरवाजा खोला व अंकल ने फोन लगाकर एंबुलेंस को बुलाया उसमे मुझे डालकर ईलाज के लिये सरदारपुर अस्पताल लाये थे । शिवानी के बयान सरकारी अस्पताल धार मे तहसीलदार व्दारा लिये गये है तथा एम.व्हावय अस्पनताल में ईलाज के दौरान मेरी भतीजी शिवानी की मृत्यु हो गई। जिसकी रिपोर्ट थाना सरदारपुर पर की थी। रिपोर्ट पर से अनुसंधान कर अभियोग पत्र मा. न्याययालय सरदारपुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। मा. न्यायालय में विचारण के उपरांत अभियोजन की सहायता हेतु पीड़िता के अधिवक्ता के रूप में श्री श्रीश दुबे व श्री मनोज जाग को नियुक्त कर पीड़िता की और से न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष युक्तियुक्त संदेहों से परे मानकर मा. न्यालयालय द्वारा प्रमाणित पाकर आरोपी रविल ऊर्फ रवि पिता समरिया परमार भील निवासी भीलखेड़ी तह. सरदारपुर जिला धार(म.प्र.) को धारा 302 भादवि में आजीवन कारावास एवं 1000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया । पीड़िता की और से अधिवक्ता श्रीश दुबे व अधिवक्ता मनोज काग ने पैरवी की।
