इटारसी। बैंक ऑफ बड़ौदा की नेहरूगंज शाखा के पूर्व कैशियर योगेश दहाट को वित्तीय अनियमितताओं और गबन के मामले में न्यायालय ने सजा सुनाई है। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनीता खजूरिया की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 5 वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
जिला लोक अभियोजक भूरेसिंह भदौरिया ने बताया कि जांच में कुल 18 लाख 61 हजार रुपए के गबन का खुलासा हुआ था। आरोपी ने इसमें से लगभग साढ़े चार लाख रुपए बैंक में वापस जमा कर दिए थे। हालांकि, शेष लगभग 14 लाख रुपए के गबन को न्यायालय में सिद्ध किया गया। यह राशि सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल के खातों से संबंधित थी।
स्कूल की बचत राशि का गबन
अभियोजन पक्ष के अनुसार, योगेश दहाट ने 21 मई 2021 से 11 अप्रैल 2022 के दौरान कैशियर के रूप में काम करते हुए स्कूल के बचत और चालू खातों में जमा की गई राशि को बैंक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया। वह ग्राहकों को जमा पर्ची की एक प्रति देता था, जबकि दूसरी प्रति और नकद राशि अपने पास रख लेता था। बाद में, फर्जी बैंक स्टेटमेंट तैयार कर खाताधारकों को गुमराह किया जाता था।
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब स्कूल प्रबंधन ने खातों में लगातार अनियमितताएं पाए जाने पर बैंक से शिकायत की। स्कूल मैनेजर एलिस इब्राहिम ने बैंक में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर जमा राशि में हेराफेरी और फर्जी स्टेटमेंट की प्रतियां दीं। बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधक सिद्धार्थ पाटील की शिकायत पर 26 अगस्त 2022 को थाने में अपराध दर्ज किया गया।
आरोपी सट्टा खेलने का आदी
जिला लोक अभियोजक भूरेसिंह भदौरिया ने बताया कि आरोपी आईपीएल क्रिकेट में सट्टा खेलने का आदी था। उसने खाताधारकों की रकम सट्टे में लगा दी, जिससे उसे भारी नुकसान हुआ। इसी कारण वह गबन की राशि वापस नहीं कर सका।
न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 409 के तहत दोषी ठहराया। धारा 467, 471 और 409 के तहत उसे 5-5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि धारा 420 और 468 के तहत 3-3 वर्ष के कठोर कारावास का दंड दिया गया। प्रत्येक धारा में 2-2 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। शासन की ओर से जिला लोक अभियोजक भूरेसिंह भदौरिया ने पैरवी की।
