इंदौर: ज्ञान ही भारत का वास्तविक शस्त्र है, और भारतीय सभ्यता ने सदैव शक्ति के स्थान पर ज्ञान को अपना आधार बनाया है. अनादिकाल से भारत ने शस्त्र के बजाय ज्ञान के माध्यम से विश्व को दिशा देने का कार्य किया है।यह बात उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कही. वे मध्य प्रदेश के विकास के लिए शिक्षा विषय पर आयोजित मध्यप्रदेश ज्ञान सभा के समापन समारोह को मुख्य अतिथ्य के रुप में संबोधित कर रहे थे. मंत्री परमार ने कहा कि ज्ञान सभा मप्र को दिशा देने की कोशिश के रूप में देखता हूं.
भारत के भाव पर गर्व करना शिक्षा के मन्दिरों से निकलना चाहिए. गुलामी के भाव को बाहर करना है. 2020 शिक्षा नीति आने के बाद हमने अपने को पहचानना प्रारम्भ कर दिया है. भारत ने ज्ञान के आधार पर दुनिया को जीता था. शक्ति का आधार भारत का ज्ञान है. समापन कार्यक्रम में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पुरुषोत्तमदास पसारी ने भी संबोधित किया.
प्रति कुलाधिपति कमल नारायण जी भुराडिया भी समारोह में उपस्थित रहे. कुलगुरु डॉ. योगेश चंद्र गोस्वामी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि शिक्षा केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है. समापन कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव को इण्डिया नहीं भारत का प्रयोग करने पर सम्मानित किया गया. समापन कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिनेश दवे ने किया.
शिक्षक महत्वपूर्ण रोल निभा सकते हैं
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली द्वारा श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय एवं मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग भोपाल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय मध्यप्रदेश ज्ञानसभा मध्य प्रदेश के विकास में शिक्षा विषय पर आयोजित की गई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य ने ज्ञानसभा के दूसरे दिवस सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत को भारतीय अवधारणा के साथ दिखाने और सिखाने में शिक्षक महत्वपूर्ण रोल अदा कर सकते हैं. शिक्षकों को भारत की आभा को प्रतिस्थापित और प्रतिष्ठित करने की जिम्मेदारी निभाना चाहिए. भारत एक राष्ट्र है.
