सोनी सब के कलाकारों ने राष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर अपनी यात्राओं पर विचार साझा किए, जो उन्हें प्रेरित करती है

मुंबई, (वार्ता) राष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर, सोनी सब के कलाकारों ने उन यात्राओं पर अपने विचार साझा किए, जो उन्हें प्रेरित करती हैं।

इस राष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर, सोनी सब के प्रिय कलाकार ऋषि सक्सेना, दीक्षा जोशी, श्रेणु पारिख और रजत वर्मा ने यात्रा और उन यात्राओं पर अपने विचार साझा किए, जो उन्हें प्रेरित करती हैं।

इत्ती सी खुशी में इंस्पेक्टर संजय भोसले की भूमिका निभा रहे ऋषि सक्सेना ने कहा,“मेरे लिए यात्रा कभी केवल गंतव्यों की सूची पूरी करने का विषय नहीं रही, बल्कि लोगों, स्थानों और खामोशियों को देखने का अवसर भी रही है। हर जगह की एक भावनात्मक लय होती है, और जब आप उसमें खुद को ढालते हैं, तो आप संस्कृति और स्वयं के बारे में गहरी समझ लेकर लौटते हैं। मैं यात्रा को उसी तरह अपनाता हूँ, जैसे किसी किरदार को- धीरे-धीरे और जिज्ञासा के साथ। जब आप किसी जगह को खुद को प्रकट करने देते हैं, बजाए इसके कि जल्दबाज़ी में गुजर जाएँ, तो अनुभव अधिक सच्चा और कहीं अधिक स्थायी हो जाता है।”

पुष्पा इम्पॉसिबल में दीप्ति पटेल की भूमिका निभा रही दीक्षा जोशी ने कहा,“यात्रा आपको सबसे अच्छे तरीके से चुनौती देती है, यह अनुशासन, अनुकूलनशीलता और कृतज्ञता सिखाती है। भारत में इतनी विविधता है कि हर यात्रा एक नई कक्षा जैसी लगती है। अलग-अलग संस्कृतियाँ, दिनचर्या और लोग आपको वे बातें सिखाते हैं, जो कोई किताब कभी नहीं सिखा सकती। वह अनुभव हमेशा आपके साथ रहता है। नए स्थानों की खोज मुझे मानसिक रूप से धीमा होने, अधिक अवलोकन करने और स्वयं से पुनः जुड़ने में मदद करती है।”

गणेश कार्तिकेय में देवी पार्वती की दिव्य भूमिका निभा रही श्रेणु पारिख ने कहा,“भारत में यात्रा करने की सबसे बड़ी खूबी मुझे लोगों की गर्मजोशी लगती है। चाहे आप कहीं भी जाएँ, एक अपनापन और परिचय का भाव मिलता ही है। यही मानवीय संबंध हर यात्रा को सार्थक बनाते हैं। एक अभिनेत्री के रूप में, यात्रा मुझमें भावनाओं का संचालन करती है। अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों, परंपराओं और रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अवलोकन चुपचाप इस बात को आकार देता है कि मैं कहानियों और किरदारों से कैसे जुड़ती हूँ।”

इत्ती सी खुशी में विराट खन्ना का किरदार निभा रहे रजत वर्मा ने कहा, “मेरा मानना है कि यात्रा आपको जीवन के बारे में बहुत कुछ सिखाती है। जब आप बाहर निकलते हैं, नए लोगों से मिलते हैं और अलग-अलग संस्कृतियों का अनुभव करते हैं, तो आप छोटी-छोटी खुशियों की अधिक सराहना करने लगते हैं। असली खुशी वहीं से और उन्हीं पलों से आती है, जिन्हें आप योजना का हिस्सा नहीं बनाते, लेकिन हमेशा याद रखते हैं। हर जगह एक भावना से जुड़ी होती है। जब आप खुले दिल से यात्रा करते हैं, तो आप केवल गंतव्यों को देखते नहीं, उन्हें महसूस करते हैं और वह जुड़ाव हमेशा आपके साथ रहता है।”

 

 

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