
गरोठ। गोसेवक संत महात्माओं के नेतृत्व में गौमाता को सम्मान दिलाने एवं उन्हें राष्ट्रमाता घोषित कराने के उद्देश्य से गौ सम्मान आह्वान अभियान का शुभारंभ गरोठ से किया गया। इस अभियान के अंतर्गत गो कथा एवं संकीर्तन के माध्यम से जनजागरण कर सरकार का ध्यान गौ सेवा और गौ संरक्षण की ओर आकर्षित किया जाएगा।
होटल मंगलमय रिसोर्ट, गरोठ में आयोजित भव्य कार्यक्रम में देशभर से आए पूज्य संतों एवं गौसेवकों की उपस्थिति में राष्ट्रव्यापी गौ सेवा अभियान की रूपरेखा तय की गई। रविवार 25 जनवरी 2026 को आयोजित पत्रकार वार्ता एवं संत संवाद कार्यक्रम में अभियान की विस्तृत कार्ययोजना साझा की गई।
इस अवसर पर परम पूज्य रमणानंद सरस्वती महाराज (पुष्कर), गोपेश कृष्ण दास महाराज (वृंदावन), प्रकाश नारायण महाराज, सनातन महाराज, चंद्रमा दास महाराज, ओंकारदास महाराज, ध्रुव महाराज एवं बहादुर सिंह सहित अनेक संतों ने पत्रकारों से संवाद किया। संतों ने बताया कि 22 से 25 जनवरी 2026 तक आयोजित कार्यशाला में भारत के 36 राज्यों के 790 जिलों से आए लगभग 1100 गौसेवकों ने पूज्य संतों के सान्निध्य में गहन मंथन किया।
कार्यशाला में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यह अभियान किसी संस्था, संगठन या राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं, बल्कि गौमाता और नंदी बाबा के सान्निध्य में संचालित होगा। अभियान का उद्देश्य गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना, गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगवाना तथा गोवर्धन संस्कृति के संरक्षण हेतु ठोस सरकारी नीतियां बनवाना है।
संतों ने केंद्र सरकार से गौ रक्षा हेतु केंद्रीय कानून बनाए जाने, गौहत्या एवं गौ तस्करी में लिप्त अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा, जब्त वाहनों को गोशालाओं के उपयोग में लाने की मांग की। साथ ही गोबर एवं गोमूत्र आधारित अनुसंधान विश्वविद्यालयों की स्थापना, पंचगव्य औषधियों का आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में नि:शुल्क वितरण, सरकारी भवनों में गोबर पेंट एवं गौनाइल के अनिवार्य उपयोग की भी मांग रखी गई।
इसके अतिरिक्त गौशालाओं को मनरेगा से जोड़ने, बिजली बिल में छूट देने तथा निराश्रित गौवंश के लिए चारे की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
