मुंबई, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने आज अपने प्रमुख हितधारकों के साथ दीर्घकालिक संबंधों को सुदृढ़ करने के प्रयासों के तहत पारसी समुदाय के सदस्यों के साथ संवाद स्थापित किया। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब बैंक ने 31दिसंबर, 2025को समाप्त तिमाही के लिए बेहतर वित्तीय परिणामों की घोषणा की है।
सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया का पारसी समुदाय के साथ गहरा ऐतिहासिक संबंध है। बैंक की स्थापना 1911में सर सोराबजी पोचखानवाला द्वारा की गई थी, जिन्होंने इस संस्थान को “राष्ट्र की संपत्ति और देश की धरोहर ” बताया था। बैंक के प्रथम अध्यक्ष सर फिरोजशाह मेहता भी पारसी समुदाय से ही थे। अपने 114 वर्षों के इतिहास में बैंक ने कई आर्थिक चक्रों का सफलतापूर्वक सामना किया है और हमेशा “जनता का अपना बैंक” होने के अपने मूल दर्शन पर अडिग रहा है।
बैंक ने भारत के आर्थिक विकास में पारसी समुदाय द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया, विशेष रूप से उद्योग, वित्त, व्यापार और परोपकार के क्षेत्रों में, जिनके माध्यम से अनेक प्रतिष्ठित उद्यमों और संस्थानों की स्थापना हुई, जिन्होंने देश के कॉरपोरेट परिदृश्य को आकार दिया है।
कार्यक्रम में पारसी समुदाय के अनेक प्रमुख और प्रतिष्ठित सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिनमें बैंक के संस्थापक और प्रथम अध्यक्ष के वंशज, एचडीएफसी के पूर्व उपाध्यक्ष और सीईओ श्री केकी मिस्त्री, श्री जिमी मिस्त्री, श्री मिकी मेहता, बॉम्बे पारसी पंचायत के पूर्व अध्यक्ष श्री दिनशॉ मेहता, बॉम्बे पारसी पंचायत के वर्तमान अध्यक्ष श्री विराफ मेहता, पद्म श्री सुश्री पीनाज मसानी और श्री रतन लूथ आदि शामिल थे। उनकी उपस्थिति ने इस संवाद को विशेष ऐतिहासिक महत्व प्रदान किया।
इस संवाद के माध्यम से ऐतिहासिक संबंधों का नवीनीकरण हुआ और साथ ही बैंक की ग्राहक-केंद्रित पहलों तथा खुदरा, एमएसएमई, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने में उसकी भूमिका को प्रदर्शित किया गया। बैंक ने कुल व्यवसाय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। इसके साथ ही बैंक का कासा आधार उद्योग में सर्वश्रेष्ठ में से एक है, अग्रिमों में सुदृढ़ वृद्धि हुई है तथा परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार आया है।
बैंक के वरिष्ठ नेतृत्व ने संस्थापक के उस दूरदर्शी दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला,जिसमें उन्होंने एक ऐसा भारतीय बैंक बनाने का सपना देखा था जो पूर्णतः भारतीयों के स्वामित्व और संचालन में हो, विशेषकर उस दौर में जब भारत में बैंकिंग क्षेत्र पर विदेशी संस्थानों का वर्चस्व था। । उन्होंने यह भी बताया कि विश्वास, दृढ़ता और उत्कृष्टता जैसे मूल्य, जो पारसी परंपरा की पहचान हैं, आज भी बैंक की यात्रा का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
इस अवसर पर बैंक के अधिकारियों ने संस्थान के शुरुआती वर्षों में पारसी समुदाय के अटूट समर्थन के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने ग्राहक-केंद्रित, नैतिक और समावेशी बैंकिंग के माध्यम से अपने संस्थापक की विरासत को बनाए रखने की बैंक की प्रतिबद्धता को दोहराया।
इस अवसर परसेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक एवंमुख्य कार्यपालक अधिकारीश्री कल्याण कुमारने कहा, “पारसी समुदाय के साथ यह संवाद विचारों के आदान-प्रदान और उनकी बदलती बैंकिंग अपेक्षाओं को बेहतर ढंग से समझने का एक मूल्यवान अवसर रहा। हमारे उत्पादों और सेवाओं में उनकी गहरी रुचि समुदाय की सेवा जारी रखने और दीर्घकालिक संबंधों को मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।”
इस प्रकार के संवाद बैंक की प्रमुख हितधारकों के साथ संबंधों को और गहरा करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया भविष्य में भी समय-समय पर ऐसे संवाद आयोजित करने की योजना बना रहा है, ताकि सतत ग्राहक सहभागिता के माध्यम से अपने खुदरा बैंकिंग व्यवसाय को और सुदृढ़ किया जा सके।
