जबलपुर: हुनर कहीं भी पनप सकता है, बस उसे सही दिशा और अवसर मिलने की ज़रूरत होती है। ऐसा ही कुछ केंद्रीय जेल जबलपुर में देखने को मिला। बंदियों ने कबाड़ से जुगाड कर कमाल दिखाया। बंदियों के हुनर से जेल में मिनी जुरासिक पार्क, झरना, ताल बन गया। कैदियों ने अपनी रचनात्मकता से सबको हैरान कर दिया।दरअसल जेल प्रशासन की पहल के तहत कैदियों ने जेल परिसर में पड़े बेकार लोहे, पुराने टायरों, लोहे की कतरनों और कबाड़ का उपयोग किया। कैदियों ने मिलकर कबाड़ से विशालकाय डायनासोर, झरने और सुंदर तालाब (ताल) बनाए हैं। इसे अब “मिनी जुरासिक पार्क” का नाम दिया गया है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य बंदियों की नकारात्मक सोच को सकारात्मकता में बदलना और उन्हें हुनरमंद बनाना है ताकि रिहाई के बाद वे समाज में सम्मान से रह सकें।
क्यों है यह खास
उप जेल अधीक्षक मदन कमलेश ने बताया कि कैदियों ने जेल परिसर में पड़े बेकार लोहे, पुराने टायरों, लोहे की कतरनों और कबाड़ का उपयोग कर कबाड़ से विशालकाय डायनासोर, झरने और सुंदर तालाब (ताल) बनाए हैं। जेल की दीवारों के पीछे इस तरह की कलाकृतियां बनाना कैदियों के तनाव को कम करने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का एक जरिया है। कबाड़ का पुनर्चक्रण कर उसे कला में बदलना पर्यावरण के लिहाज से भी एक बेहतरीन कदम है। यह पार्क इतना सुंदर बना है कि यह चर्चा का विषय बन गया है और जेल के अंदर एक सकारात्मक वातावरण तैयार कर रहा है।
