अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने लगातार चौथी बार ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव: मुद्रास्फीति और आर्थिक अनिश्चितता पर नजर, टैरिफ का प्रभाव एक प्रमुख कारक

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने बेंचमार्क दर को 4.25%-4.5% पर बरकरार रखा; राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीतियों और वैश्विक अनिश्चितता को ठहराया ठहराव का कारण।

वॉशिंगटन डीसी, 19 जून (वार्ता): अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व ने अपनी नवीनतम मौद्रिक नीति बैठक में लगातार चौथी बार बेंचमार्क ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने ब्याज दर को 4.25%-4.5% के लक्ष्य दायरे में स्थिर रखने का निर्णय लिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था आर्थिक अनिश्चितता और मुद्रास्फीति के जोखिमों का सामना कर रही है, विशेष रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के संभावित प्रभावों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात पर जोर दिया कि केंद्रीय बैंक अभी भी “उच्च मुद्रास्फीति” के प्रति सतर्क है, भले ही बेरोजगारी दर कम बनी हुई हो और श्रम बाजार मजबूत हो। उन्होंने यह भी कहा कि टैरिफ से होने वाली मुद्रास्फीति को समझने के लिए कुछ महीनों तक इंतजार करना बेहतर होगा, इससे पहले कि कोई दर समायोजन किया जाए। FOMC की “डॉट प्लॉट” भविष्यवाणियों से पता चलता है कि फेड अधिकारी 2025 में 50 आधार अंकों (0.50%) की दर कटौती की उम्मीद कर रहे हैं, हालांकि 2026 और 2027 के लिए कटौती का अनुमान कम हो गया है। बाजारों और अर्थशास्त्रियों को इस बार दरें स्थिर रहने की व्यापक उम्मीद थी। फेड का यह कदम दर्शाता है कि वह आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक विकास के आधार पर लचीली नीति बनाए रखना चाहता है।

ब्याज दरों में इस स्थिरता का सीधा असर उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर पड़ेगा। जब केंद्रीय बैंक अपनी दरों को स्थिर रखता है, तो ऋण और अन्य क्रेडिट सुविधाओं की लागत में तत्काल कोई बड़ी राहत नहीं मिलती है। गिरवी, ऑटो ऋण और क्रेडिट कार्ड ऋण पर उधार लेने की लागत बेंचमार्क दर से प्रभावित होती है। फेड का मानना है कि अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है, जिससे उन्हें दरों में बदलाव करने से पहले अधिक डेटा एकत्र करने का समय मिल रहा है। हालांकि, फेड ने यह भी स्वीकार किया कि आर्थिक परिदृश्य के बारे में अनिश्चितता कम हुई है, लेकिन अभी भी बनी हुई है। इसका मतलब है कि भविष्य की दर कटौती टैरिफ के प्रभाव, मुद्रास्फीति के मार्ग और वैश्विक आर्थिक स्थितियों पर निर्भर करेगी।

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