ब्यावरा: नगर का मुख्य नाला अतिक्रमण को चपेट में पूरी तरह पिर चुका है, पर इतनी भी जगह नहीं गयी है कि पोकलेन मशीन उदर सके इसके चलते कई स्थानों पर नाले को सफ हुए सालों हो चुके में भारी गंदगी के कारण महामारी फैलने का डर बना रहता है गंदगी और उठती दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गौरतलब है कि सुलिया रोड से जूस व्यावा, अहिंसा द्वार पुल से होते हुए यह नाला सिविल आपताल रोड पुल के पहां नही में जाकर मिलता है. अधिकांशतः नाला अतिक्रमण से घिरा हुआ देखा है.पूर्व में सफाई के लिए नाले में जेसीबी मशीन उत्तर करती थी किंतु कुछ सालों से बेस्सरीबी उतरने तक की जगह नहीं तक नहीं हो सकी है.
दिनों दिन मालवे, कचरे से पट रहा नाला-आर्य समाज चौक में जैन मंदिर के समीप पुलिया के यहां नाले में काफी मलबा कचरा जमा है. यहां की सफाई हुए सालों ही चुका है, क्योंकि यहां जेसीबी
पोकलेन मशीन उतरने की जगह नहीं बची है. आज से पांच-आत साल पूर्व तक यहां नाले में जेसीबी उतराकर सफाई कराई जाती थी लेकिन अब मशीन उतरना का रास्ता तक नहीं बचा है, जिससे सालों से सफाई नहीं होने के कारण भारी गंदगी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. नाता मतने, कचरे से उथला ही रहा है.
मच्छर कीटाणु पनप रहे है, ये हालात महामारी को आमंत्रण देते नजर आ रहे है. नालियां भी अतिक्रमण की चपेट में जहां नगर में मौजूद नालियों की सफाई हुई एक माह तक का समय गुजर जाता है, वहीं कई जगह नालियों के अतिक्रमण की चपेट में होने से इनकी समुचित सफाई नहीं हो पाती है. प्रायः देखा गया है कि अनेक स्थानों पर नालियां दिखाई ही नहीं देती है.आधा दर्जन नाले मिलते नदी में विडम्बना यह है कि स्थानीय छोटे-बड़े करीब आधा दर्जन नालों की निकासी नदी में जाकर मिलती है. सीधे तौर पर नालों का गंदा पानी नदी में पहुंचता है. ऐसे में नदी की स्वच्छता कैसे बरकरार रहेगी. जितनी दुर्दशा स्थानीय अजनार नदी की हो रही है संभवतः उतनी दुर्दशा अन्य किसी जगह नदियों की नहीं दिखाई देती.
