
खंडवा। जिन हाथों ने कोरोना जैसी महामारी के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों की सेवा की, आज वही हाथ अपने हक के वेतन के लिए अधिकारियों के सामने हाथ फैलाने को मजबूर हैं। नंदकुमार सिंह चौहान शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय खंडवा में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के सामने जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि पिछले तीन महीनों से इन कर्मचारियों को एक रुपया भी नसीब नहीं हुआ है।
2018 से दे रहे हैं सेवा, अब बताया जा रहा पद स्वीकृत नहीं :कॉलेज की शुरुआत से सेवा दे रहे इन कर्मचारियों को अब प्रशासनिक पेचीदगियों का हवाला देकर वेतन से वंचित रखा जा रहा है। कॉलेज प्रशासन का तर्क है कि शासन द्वारा आउटसोर्सिंग के तहत केवल हाउसकीपिंग और सुरक्षाकर्मियों के पद स्वीकृत हैं, जबकि मल्टी-टास्किंग स्टाफ के लिए उचित वेतन शीर्ष निर्धारित नहीं है। इसी तकनीकी पेंच के कारण इन कर्मचारियों का वेतन नवंबर माह से रोका गया है।
डीन के आश्वासन के बाद भी नहीं मिला समाधान :कर्मचारियों ने बताया कि जब 5 जनवरी 2026 को उन्होंने हड़ताल का नोटिस दिया था, तब डीन ने उन्हें आश्वस्त किया था कि वरिष्ठ कार्यालय से संपर्क कर समस्या का जल्द निराकरण किया जाएगा। लेकिन 20 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है। जब कर्मचारी पुन: डीन से मिले और कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो उन्होंने अब सीधे लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, भोपाल के आयुक्त को पत्र लिखकर गुहार लगाई है।
कोरोना काल को याद कर भावुक हुए कर्मचारी
आयुक्त को भेजे गए पत्र में कर्मचारियों ने अपना दर्द बयां करते हुए लिखा है कि जब कॉलेज में नियमित स्टाफ नहीं था, तब उन्होंने ही पूरी व्यवस्था संभाली।
प्रशासन से सीधी मांग
कर्मचारियों ने कहा कि यदि उनके वेतन का तत्काल भुगतान नहीं किया गया और नौकरी को सुरक्षित करने के लिए पदों की स्वीकृति नहीं मिली, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इन कोरोना वारियर्स की सुध लेते हैं या तकनीकी नियमों की आड़ में इनका शोषण जारी रहता है।
