मिनेसोटा (अमेरिका) | अमेरिका के मिनेसोटा राज्य से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहाँ 5 वर्षीय लियाम कोनेजो रामोस को उसके स्कूल से घर लौटते समय फेडरल एजेंटों (ICE) ने हिरासत में ले लिया। लियाम अपने पिता के साथ था, जब नकाबपोश और भारी हथियारों से लैस एजेंटों ने उन्हें घेर लिया। चौंकाने वाली बात यह है कि रामोस परिवार के अनुसार, वे अमेरिका में शरणार्थी आवेदक के रूप में पूरी तरह कानूनी रूप से रह रहे थे। बच्चे की नीली टोपी और कंधे पर टंगे स्पाइडर-मैन बैग वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं, जिसने मानवीय अधिकारों और ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियों पर नई बहस छेड़ दी है।
कोलंबिया हाइट्स स्कूल बोर्ड और बच्चे के परिजनों ने संघीय एजेंटों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि एजेंटों ने बच्चे को ‘चारे’ की तरह इस्तेमाल किया ताकि घर के अंदर मौजूद उसकी माँ को बाहर आने पर मजबूर किया जा सके और उन्हें भी हिरासत में लिया जा सके। हालांकि, लियाम के पिता ने अपनी पत्नी को अंदर रहने की चेतावनी दी ताकि परिवार का कम से कम एक सदस्य सुरक्षित रहे। स्कूल अधिकारियों और पड़ोसियों ने बच्चे को अपनी कस्टडी में लेने की पेशकश की थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे बेरहमी से खारिज कर दिया और पिता-पुत्र दोनों को टेक्सास के एक डिटेंशन सेंटर भेज दिया।
इस कार्रवाई पर अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना आक्रोश जाहिर करते हुए कहा कि लियाम सिर्फ एक बच्चा है, जिसे अपने परिवार के साथ घर पर होना चाहिए था, न कि किसी जेल जैसे हिरासत केंद्र में। हैरिस ने ट्रंप प्रशासन की इस कार्यप्रणाली को ‘अमानवीय’ करार दिया है। वर्तमान में लियाम समेत चार नाबालिगों को अलग-अलग केंद्रों में रखा गया है, जिसके खिलाफ मानवाधिकार संगठन और स्कूल डिस्ट्रिक्ट प्रशासन कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

