
मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
आलीराजपुर कांग्रेस जिलाध्यक्ष का पद मुकेश पटेल के दिसंबर में इस्तीफा देने के बाद से खाली है. पटेल परिवार के इर्दगिर्द घूमती जिले की कांग्रेस राजनीति इसके कारण ठप पड़ी है. आलीराजपुर से 2018 में विधायक रहे मुकेश पटेल ने पार्टी के लिए समयाभाव की बात रख इस्तीफा दिया था, लेकिन बताया जाता है कि 2023 के चुनाव में उनकी हार का कारण बने निर्दलीय प्रत्याशी पूर्व जिपं अध्यक्ष वकीलसिंह ठकराला के पक्ष में तथाकथित 3 कांग्रेसी नेताओं ने बेधडक़ प्रचार किया था. पटेल की नजर में इन नेताओं ने गद्दारी की थी और उनकी हार हुई. जबसे ही वे इन नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने का दबाव बनाए हुए थे. कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने देखा कि उनके समर्थकों की बजाए मंच पर उनके खिलाफती नेताओं को पार्टी ने सबक तो दिया नहीं, उल्टे सम्मान व तवज्जो दी जा रही है तो अगले दिन ही पटेल ने पद त्याग दिया. अब जिले में निष्क्रिय पड़ी पार्टी गतिविधियों पर कार्यकर्ता असमंजस में हैं क्या करें. इसी तारतम्य में ब्लॉक कार्यकर्ताओं की बैठक में संगठन मजबूती पर जोर, जिला व ब्लॉक अध्यक्ष की शीघ्र नियुक्ति की मांग की गई. लेकिन प्रदेश कांग्रेस यहां दुविधा में है कि मुकेश पटेल की नाराजगी दूर किए बिना किसे जिलाध्यक्ष बनाया जाए. कार्यकर्ता पंचायत चुनाव से पूर्व शीघ्र ही जिला कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति चाहते हैं, ताकि संगठन को सक्रिय, संगठित और मजबूत बनाया जा सके.
सिंघार के फिर वही सुर!
विगत दिनों बुरहानपुर के ग्राम चैनपुरा में आयोजित आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन में विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने फिर आदिवासियों को स्वतंत्र धर्म का ठहराने की कोशिश की. समाज को हिंदू से अलग बताने पर हुए विवाद के बाद इस बार वे खुलकर तो नहीं बोले, लेकिन इशारा वही था. सिंघार ने मंच से कहा हम जंगल, सूर्य, गाय, बैल, फसल की पूजा करते हैं, लेकिन आज देश के अंदर वह आदिवासी कोड नहीं मिल पा रहा है, क्यों, क्या हमारी पहचान को खत्म करने की साजिश तो नहीं है. उन्होंने आदिवासी समाज से अलग आदिवासी कोड के लिए पूरे देश में मूवमेंट चलाने की बात भी कही.
मंजू दादू के जी का जंजाल
नेपानगर विधानसभा अंतर्गत पांगरी जलाशय का मामला नेपा विधायक मंजू दादू के लिए जी का जंजाल बन गया है. बुरहानपुर जिले के नेपानगर में पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना का कार्य क्षेत्र उतावली नदी पर पांगरी गांव के पास है. परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में लगभग 4400 हेक्टेयर भूमि को सिंचित करना है. पांगरी बांध के कारण पांगरी, बसाली और नागझिरी गांवों की लगभग 287 हेक्टेयर भूमि डूब क्षेत्र में आ रही है, जिससे लगभग 300 किसान और 700 परिवार प्रभावित/विस्थापित हो रहे हैं. विधायक मंजू दादू नियमानुसार पुनर्वास ओर मुआवजा दिलाने को तत्पर हैं, परंतु कई समय से आंदोलनरत किसान दोहरे मुआवजा पाने के लिए अड़े हुए हैं. इसके लिए किसानों का सारा दबाव निकटतम जनप्रतिनिधि होने के नाते विधायक मंजू दादू पर है. उनकी बात उपर तक पहुंचाने के आश्वासन के बाद फिलहाल 10 मार्च तक आंदोलन स्थगित कर दिया है. इससे फौरी तौर पर दादू को राहत जरूर मिल गई, मगर देखते हैं समय सीमा के बाद मंजू दादू किसानों की दोहरे मुआवजे की मांग पूरी करवाती हैं या मामले को किस तरह सुलझा पाती हैं.
