इन्दौर: शहर में वाहनों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी, खस्ताहाल सड़कों और अव्यवस्थित पार्किंग के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे ट्रैफिक जाम एक गंभीर और भयावह समस्या बन गया है. शहर में अब इंसानों से ज्यादा गाडिय़ां हो गई हैं और रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या 30 लाख के पार हो चुकी है. शहर के कई चौराहों पर अक्सर लंबा जाम लग जाता है.
सड़कों का पार्किंग स्थल बन जाना, संकरी सड़कें नियमों का उल्लंघन और बुनियादी ढांचे का धीमी गति से विकास इसके प्रमुख कारण हैं.
रेंगते हुए ट्रैफिक के कारण लोगों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है और प्रदूषण बढ़ रहा है. इसके अलावा, एम्बुलेंस का जाम में फंसना और आपातकालीन सेवाओं में देरी भी आम हो गई है. हाई कोर्ट ने ट्रैफिक प्रबंधन को सुधारने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं. इसके बावजूद यातायात व्यवस्था सुचारू नहीं हो पा रही है. ट्रैफिक समस्या के समाधान के लिए सड़कों को चौड़ा करना, सार्वजनिक पार्किंग का निर्माण और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन आवश्यक बताया जा रहा है.
हालांकि, शहर के कुछ मुख्य चौराहों पर यातायात विभाग द्वारा सख्ती के साथ चालानी कार्रवाई की जा रही है, यह जरूरी भी है, लेकिन यातायात विभाग लगता है जन सुविधा के लिए सुगम यातायात की योजनाओं को सिर्फ कागजों पर तैयार करता है. यातायात नियंत्रण के लिए आज तक जितनी भी योजनाएं बनाई गई हैं, वह सभी कुछ ही दिनों के लिए दिखाई पड़ती हैं, फिर विलुप्त सी हो जाती हैं. शहर के यातायात को देखकर लगता है कि व्यवस्थाएं खुद वाहन चालकों के ही सुपुर्द कर दी गई हैं, अब हर कोई अपनी मनमर्जी से वाहन चलाकर दूसरों के लिए समस्याएं खड़ी कर रहा है, वहीं यातायात कर्मी या तो मौन नजर आते हैं या फिर चालानी कार्रवाई में व्यस्त रहते हैं.
यह बोले नागरिक
जहां सिग्नल लगे हैं, उन चौराहों के अलावा अधिक ध्यान जवाहर मार्ग, लोहा मंडी, सियागंज जैसे व्यवसाय क्षेत्र में देना चाहिए, क्योंकि यातायात कर्मी ना होने से यहां घंटों तक जाम नहीं खुलता.
– इमरान कुरैशी
सुगम यातायात को लेकर यातायात विभाग द्वारा जो योजनाएं बनाई जाती हैं, वह पत्थर की लकीर होना चाहिए, उसमें कुछ बदलाव जरूर हो सकते हैं, लेकिन बंद नहीं होना चाहिए, इसी से सफलता मिल पाएगी.
– सुनील कुमार
स्पीड के लिए हम मेट्रो और बुलेट ट्रेन की बात करते हैं, जबकि यातायात गतिहीन हो चुका है. शहर में मिनटों का सफर घंटों में तब्दील हो गया है, जो चिंताजनक है.
– अनिल बेनवाल
