अवैध नियुक्तियों के सिलसिले में पूर्व आईएफएस अधिकारी बेलवाल के विरुद्ध मामला दर्ज

भोपाल, 17 फरवरी (वार्ता) मध्यप्रदेश के आजीविका मिशन में अवैध नियुक्तियों के संबंध में आज आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने इस संबंध में प्राप्त शिकायतों और अदालत के दिशानिर्देशों के अनुरूप राज्य रोजगार गारंटी परिषद के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ प्रारंभिक जांच (पीई) पंजीबद्ध कर ली है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार स्थानीय निवासी राजेश कुमार मिश्रा द्वारा ईओडब्ल्यू में प्रेषित शिकायत आवेदन, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी एवं सीजेएम भोपाल से प्राप्त आवेदन पत्रों और निर्देशों के तारतम्य में शिकायतकर्ता द्वारा आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर ईओडब्ल्यू ने पूर्व आईएफएस अधिकारी एवं तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्यप्रदेश राज्य आजीविका मिशन के विरुद्ध प्रारंभिक जांच पंजीबद्ध की गयी है। विस्तृत जांच रिपोर्ट, श्रीमती नेहा मारव्या, तत्कालीन अपर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद की जांच के आधार पर तैयार की गयी है।
श्रीमती नेहा मारव्या द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव को आठ जून 2022 को प्रेषित जांच प्रतिवेदन के अवलोकन और विस्तृत परीक्षण उपरांत यह पाया गया कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी ललित मोहन बेलवाल द्वारा प्रतिनियुक्ति के समय वर्ष 2015 से 2023 के बीच अपने पद का दुरुपयोग करते हुये राज्य परियोजना प्रबंधक के पदों पर सलाहकारों की अवैध नियुक्तियां की गईं। श्री बेलवाल द्वारा सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विभाग के निर्देशों को दरकिनार करते हुये एवं संबंधित नस्तियों में छेड़छाड़ करते हुये तत्कालीन विभागीय मंत्री की आपत्तियों को भी नजरअंदाज करते हुये यह नियुक्तियां की गईं।
श्रीमती मारव्या की विस्तृत जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि जिस मानव संसाधन मार्गदर्शिका के नियमों के आधार पर स्वीकृत पदों के विरुद्ध श्री बेलवाल द्वारा नियुक्तियां की गई हैं, वह मानव संसाधन मार्गदर्शिका तब अस्तित्व में नहीं थी।
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि अवैधानिक नियुक्तियों के साथ-साथ अन्य संवर्गों में लागू जीवन यापन लागत सूचकांक को श्री बेलवाल द्वारा नजरअंदाज करते हुये इन अवैध नियुक्तियों के मानदेयों में 40 प्रतिशत तक की “असम्यक” बढ़ोत्तरी की गई।
आरोप है कि श्री बेलवाल द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुये बिना अर्हता के श्रीमती सुषमारानी शुक्ला और उनके परिवार के सदस्यों श्री देवेन्द्र मिश्रा, सुश्री अंजू शुक्ला, श्री मुकेश गौतम, श्री ओमकार शुक्ला एवं आकांक्षा पाण्डे की नियुक्तयां मिशन के विभिन्न पदों पर की गईं। यह भी आरोप है कि श्री बेलवाल द्वारा अवैधानिक तरीके से बिना शासन एवं वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के “कम्युनिटी बेस्ड माइक्रो इंश्योरेश बीमा योजना के अंतर्गत, बीमा कराने के नाम पर 81,647 महिलाओं से प्रति महिला 300 रुपये प्राप्त कर किसी भी तरीके की बिना बीमा पॉलिसी दिये हुये 1.73 करोड़ रुपये का गबन किया गया।
उपरोक्त के संबंध में न्यायालय के निर्देश के परिप्रेक्ष्य में श्रीमती नेहा मारव्या की विस्तृत जांच रिपोर्ट एवं श्री मिश्रा के शिकायत पत्र के विस्तृत परीक्षण उपरांत श्री ललित मोहन बेलवाल (सेवानिवृत्त आईएफएस), तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन मध्यप्रदेश एवं अन्य के विरुद्ध ईओडब्ल्यू में प्रारंभिक जांच पंजीबद्ध की गई है।
कुछ समय पहले यह मामला उठने पर श्री बेलवाल के उस समय के एक तत्कालीन वरिष्ठतम अधिकारी के साथ संपर्कों के संबंध में काफी बातें मीडिया में आयी थीं।

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