जल-मल प्राधिकरण बोर्ड का प्रस्ताव भेजेंगे शासन को

इंदौर: इंदौर में जल मल प्राधिकरण बोर्ड गठित करने के का प्रस्ताव शासन को भेजेंगे. शहर की पानी और ड्रेनेज समस्याओं के समाधान हेतु विशेषज्ञों की कमेटी बनाई जाएगी.उक्त बात आज इंदौर उत्थान अभियान समिति और महापौर के साथ जल मल समस्या और बोर्ड गठन की चर्चा में तय की गई है. आज इंदौर उत्थान अभियान समिति ने भागीरथपुरा घटना के बाद एआईसीटीएसएल सभाकक्ष में जल मल समस्याओं को लेकर महापौर के साथ बैठक की बैठक में जल मल प्राधिकरण बोर्ड गठित करने और पानी बचाने और राजस्व वसूली को लेकर प्रेजेंटेशन दिया गया.

इसके बाद समिति के सदस्यों ने अपने सुझाव और दूसरे शहरों में पानी और ड्रेनेज सिस्टम के जानकारी दी. बैठक में इंदौर उत्थान अभियान के प्रमुख अजीत सिंह नारंग ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन दिया. इस प्रेजेंटेशन में उन्होंने बताया कि इंदौर में सप्लाई किए जाने के दौरान नर्मदा पेयजल योजना का 34′ पानी बर्बाद होता है. शहर में जलप्रदाय को व्यवस्थित करने और ड्रेनेज का निस्तारण करने के लिए 1973 में पहली बार तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी ने जलमल बोर्ड के गठन की पहल की थी. वर्ष 1978 में जब राजेंद्र धारकर प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री थे, तब उनके द्वारा भी इस तरह की बोर्ड के गठन को मंजूरी दी गई थी. राज्य सरकार ने 1979 में इस तरह के बोर्ड के गठन को मंजूरी दी थी. कैलाश विजयवर्गीय जब महापौर इंदौर थे तब उन्होंने ने भी इस प्राधिकरण के गठन हेतु शासन को लिखा था.

जलकर की दर का युक्ति युक्त करण करना चाहिए
नारंग ने बताया कि इंदौर की जलप्रदाय योजना में जितना घाटा होता है, उसे उठाते हुए इस योजना को चला पाना इंदौर नगर निगम के लिए संभव नहीं है. इसके लिए आवश्यक है कि जल और मल निवारण प्राधिकरण का गठन किया जाए. हमें शहर में जलकर की दर का युक्तियुक्त करण करना चाहिए. गरीब नागरिकों को सस्ता, मध्यम वर्ग की नागरिकों को मध्य कीमत का और सक्षम नागरिकों को अधिक कीमत का जल प्रदान किया जाना चाहिए. हर नल पर मीटर लगाकर जितने पानी का उपयोग उतना पैसा की नीति को अपनाना होगा. इस तरह की नीति के माध्यम से हम नर्मदा पेयजल योजना को आत्मनिर्भर योजना के रूप में परिवर्तित कर पाएंगे. प्रति व्यक्ति 60 लीटर पानी प्रतिदिन प्रदान करना होगा. इसके साथ ही मल निकासी की दर भी निर्धारित की जाना चाहिए. देश के बड़े शहरों में 20 से 30′ राशि मल निकासी के लिए ली जाती है. हम यदि अपने शहर में 10′ राशि भी लेते हैं तो उससे पूरे सिस्टम को आत्मनिर्भर बन सकेंगे.

हर घर पानी पहुंचाने में 700 रुपए महीने घाटा
समिति सदस्यों के सुझाव पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि संपत्ति कर नहीं भरने पर हम व्यक्ति की संपत्ति को सील कर देते हैं लेकिन जलकर नहीं भरने पर नल कनेक्शन नहीं काटा जाता है क्योंकि हमें मानवता को देखना है. इंदौर में हर घर जल पहुंचने पर 1000 रुपए खर्च आता है. हम नागरिकों से 300 रुपए प्रति माह जलकर लेते हैं. इस तरह से हर घर तक पानी पहुंचाने में 700 रुपए प्रति माह का घाटा है. नर्मदा पेयजल योजना का बिजली का बिल 350 करोड़ रुपए प्रति वर्ष का होता है. सोलर पैनल शुरू हो जाने पर इसमें 60 करोड़ रुपए प्रति वर्ष की बचत होगी.

 

विशेषज्ञ अधिकारी दिए जाएं
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि सैद्धांतिक तौर पर में जल प्रदाय मल निकासी प्राधिकरण के विचार से सहमत हूं. इसके लिए हम राज्य सरकार के समक्ष प्रस्ताव भेजेंगे. शहर में जल का वितरण एक बड़ी चुनौती है. अमृत 1.0 के तहत जो कार्य वर्ष 2018-19 तक पूरा हो जाना चाहिए था वह हमने 2022 में जाकर पूरा कराया है। अभी एक दो टंकी का काम और है जो की चल रहा है. भार्गव ने कहा कि अमृत 2.0 में हमें शहर की पुरानी पानी की सप्लाई लाइन को बदलना है. इसके साथ ही नए क्षेत्रों में पानी की लाइन भी डालना है. हम इंटेक की क्षमता को बढ़ा रहे हैं. नर्मदा पेयजल योजना के चौथे चरण का काम शुरू किया गया है जो की 2028 तक पूरा हो जाएगा. यह जरूरी है कि इंदौर में पानी, सीवरेज, सड़क के लिए विशेषज्ञ अधिकारी दिए जाएं. इंदौर की जलप्रदाय औ ड्रेनेज सिस्टम के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी बना दी जाएगी

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