उज्जैन: महाकुंभ में आने वाले 30 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए जो 29 किलोमीटर घाट बनाए जा रहे हैं उसमें दिव्यांग जनों की सुविधा के लिए भी इजाफा किया जा रहा है. घाट तक एप्रोच रोड जहां बनाए जा रहे हैं वहीं स्लोप से लगाकर रेलिंग भी बनाई जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की समस्या स्नान के दौरान उत्पन्न न हो.जल संसाधन विभाग के माध्यम से इंदौर की फलोदी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा घाटों का निर्माण किया जा रहा है। कई घाटों का कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष घाटों पर रिटेनिंग वॉल, स्लोप डेवलपमेंट और फिनिशिंग का कार्य प्रगति पर है.
दिव्यांग, वृद्धों पर कमिश्नर का फोकस
सिंहस्थ मेला अधिकारी एवं संभागायुक्त आशीष सिंह ने सिंहस्थ मेला कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में घाट निर्माण की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की. बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी नए घाटों पर 1.5 मीटर ऊँची सुरक्षा रैलिंग अनिवार्य रूप से लगाई जाए. दिव्यांगजनों के लिए रैंप का निर्माण किया जाए. श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से कोई समझौता न हो. शनि मंदिर के सामने बन रहे घाट को मॉडल घाट के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ सुरक्षा, सौंदर्य और सुविधा तीनों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है.
नए घाट से होंगे बड़े फायदे
29 किलोमीटर घाट निर्माण से सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान सुविधा मिलेगी। भीड़ प्रबंधन और आपात स्थिति से निपटना आसान होगा. शिप्रा तट पर अव्यवस्थित स्नान की समस्या खत्म होगी. दिव्यांग, बुजुर्ग और महिलाओं के लिए सुगम और सम्मानजनक व्यवस्था बनेगी उज्जैन की धार्मिक पर्यटन क्षमता को नई पहचान मिलेगी.
अन्य सिंहस्थ परियोजनाएँ
सिलारखेड़ी डेम का कार्य प्रगतिरत है, बारिश में इसकी टेस्टिंग की जाएगी.
कान्ह नदी का पानी डायवर्ट करने की पाइपलाइन का 3.4 किलोमीटर कार्य पूर्ण हो चुका है. पुलिस हाउसिंग, एमपीईबी, आरईएस और बीडीसी द्वारा चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई. कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने और समय-समय पर जांच के निर्देश दिए
