मुंबई | स्टार प्लस के लोकप्रिय शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में इन दिनों जबरदस्त हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है। कहानी के नए मोड़ में, मुंबई लौटते समय तुलसी और मिहिर के बीच तीखी बहस होती है। तुलसी, मिहिर को घर की कड़वी हकीकत का आईना दिखाते हुए बताती है कि जिस बेटी परी पर वह गर्व करता है, वह रणविजय के हाथों प्रताड़ित हो रही है। तुलसी मिहिर को सचेत करती है कि उसकी अनदेखी के कारण परिवार बिखर रहा है और अगर आज उसने परी के लिए स्टैंड नहीं लिया, तो नॉयना के साथ भी वही इतिहास दोहराया जाएगा जो पहले हुआ था।
घर पहुँचते ही मिहिर अपनी आंखों से वह मंजर देखता है जिसकी कल्पना उसने कभी नहीं की थी। रणविजय एक बार फिर परी पर हाथ उठाने की कोशिश करता है, जिसे देखकर ऋतिक उसे रोकने का प्रयास करता है। शुरुआत में मिहिर इसे पति-पत्नी का निजी मामला बताकर टालने का नाटक करता है, जिससे रणविजय के हौसले बढ़ जाते हैं। लेकिन अगले ही पल मिहिर का गुस्सा फूट पड़ता है। वह अपनी चप्पल उतारकर परी के हाथ में थमा देता है और उसे आदेश देता है कि जो हाथ उस पर उठा है, उसका जवाब इसी चप्पल से दे। मिहिर का यह सख्त रूप देखकर रणविजय के पसीने छूट जाते हैं।
जैसे ही परी अपने अपमान का बदला लेने के लिए रणविजय पर चप्पल उठाने वाली होती है, तभी उसकी छोटी बेटी की आवाज उसे रोक देती है। ममता के वश में होकर परी रुक जाती है और अपनी बच्ची को गले लगा लेती है, लेकिन मिहिर का संदेश साफ होता है कि अब अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, तुलसी ने अंगद और वृंदा को भी सारी सच्चाई बता दी है। अंगद जहाँ परी की चुप्पी पर नाराज है, वहीं वृंदा ने कसम खाई है कि वे सब मिलकर परी को इस नरक से बाहर निकालेंगे। अब देखना यह होगा कि क्या रणविजय इस बेइज्जती के बाद सुधरेगा या कोई नई चाल चलेगा।

