भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नबीन, 45 की उम्र में संभाली कमान, 2029 के रण और ‘मिशन साउथ’ के साथ सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां

नई दिल्ली | बिहार के कद्दावर नेता और पांच बार के विधायक नितिन नबीन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का 12वां राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्विरोध चुना गया है। महज 45 वर्ष की आयु में यह पद संभालने वाले वे पार्टी इतिहास के सबसे युवा अध्यक्ष हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में उनके नाम की औपचारिक घोषणा की गई। पार्टी हाईकमान ने 14 करोड़ कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे नबीन को उम्र के बजाय उनके पद के प्रोटोकॉल से देखें। उनके सामने सबसे पहली चुनौती पार्टी के अनुभवी दिग्गजों और ऊर्जावान युवाओं के बीच सटीक तालमेल बैठाने की होगी, ताकि संगठन की निर्णय प्रक्रिया में निरंतरता बनी रहे।

नितिन नबीन के लिए साल 2026 अग्निपरीक्षा जैसा होगा, क्योंकि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा के लिए दक्षिण भारत (Mission South) हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण किला रहा है, जहाँ पैठ बनाना नबीन का मुख्य लक्ष्य होगा। पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में अब तक सरकार न बना पाने की कसक दूर करना और असम में तीसरी बार सत्ता बरकरार रखना उनकी सांगठनिक क्षमता को साबित करेगा। इसके अलावा, कर्नाटक जैसे राज्यों में स्थानीय गुटबाजी को समाप्त कर कार्यकर्ताओं को एकजुट करना भी उनके प्राथमिक एजेंडे में शामिल है, ताकि 2029 की चुनावी जमीन अभी से तैयार की जा सके।

नबीन के कार्यकाल की सबसे जटिल चुनौती देश में हो रही जातिगत जनगणना और उसके बाद होने वाला परिसीमन होगा। जनगणना के आंकड़ों से निकलने वाले नए सामाजिक समीकरणों और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के क्रियान्वयन के बीच पार्टी की जीत सुनिश्चित करना एक बड़ा टास्क है। 2024 के चुनाव में पार्टी के 400 पार के लक्ष्य से चूकने के बाद, अब 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए एक ऐसी नई रणनीति बनानी होगी जो उत्तर भारत के गढ़ को बचाने के साथ-साथ नए क्षेत्रों में विस्तार कर सके। युवा मतदाताओं को जोड़ना और महिला नेतृत्व को राजनीति के केंद्र में लाना नितिन नबीन के नेतृत्व की असली परीक्षा होगी।

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