इंदौर: वन सीमाओं की सुरक्षा और उनसे सटे क्षेत्रों में अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए इंदौर वन मंडल ने फॉरेस्ट एनओसी व्यवस्था को और सख्त कर दिया है. महू रेंज और आसपास के इलाकों में वन सीमा से लगे क्षेत्रों में चल रही निर्माण गतिविधियों की जांच के लिए विशेष दल बनाकर मौके पर निरीक्षण शुरू कर दिया गया है.इंदौर वन मंडल के डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया कि फॉरेस्ट एनओसी किसी तरह की बाधा नहीं, बल्कि नागरिकों, निवेशकों और संस्थानों के लिए सुरक्षा कवच है.
इससे जमीन और निर्माण को लेकर भविष्य में होने वाले कानूनी विवादों से बचाव होता है और वन सीमाओं को अतिक्रमण से सुरक्षित रखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि एनओसी से लोगों को यह भरोसा मिलता है कि उनकी जमीन और निर्माण पूरी तरह वैध हैं. वन सीमा से लगे राजस्व क्षेत्रों में भूमि की खरीद-फरोख्त, मकान नक्शा स्वीकृति, कॉलोनी विकास, फार्म हाउस निर्माण, खनन गतिविधियां और लेआउट पास कराने के लिए फॉरेस्ट एनओसी को अनिवार्य किया है. बिना एनओसी किए गए निर्माण भविष्य में अवैध घोषित हो सकते हैं और इससे बड़ा आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.
राजस्व विभाग के साथ समन्वय पर विशेष जोर
उन्होंने बताया कि महू और इंदौर क्षेत्र से लगातार शिकायतें मिल रही हैं, जिनमें अधिकांश मामले वनाधिकार, भूमि विवाद और वन भूमि से लगी राजस्व जमीन पर अवैध निर्माण से जुड़े हैं. शिकायतों में बिना अनुमति कॉलोनियां, फार्म हाउस, खनन और अन्य गतिविधियों का उल्लेख है. इस पर उप वन मंडलाधिकारी महू को निरीक्षण दल बनाकर जांच और रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं. अभियान में राजस्व विभाग के साथ समन्वय पर विशेष जोर दिया है, ताकि सीमांकन और भूमि अभिलेखों की स्थिति स्पष्ट हो सके. वन विभाग की मानचित्रण शाखा जीआईएस मैपिंग से तकनीकी सहयोग दे रही है. सेना और कैंटोनमेंट प्रशासन से भी उन क्षेत्रों में समन्वय किया जा रहा है, जहां फील्ड फायरिंग रेंज वन भूमि के आसपास है.
फॉरेस्ट एनओसी की ऑनलाइन व्यवस्था को किया सरल
डीएफओ ने स्पष्ट किया कि विभाग का उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि रोकथाम और जागरूकता है. फॉरेस्ट एनओसी की ऑनलाइन व्यवस्था को सरल बनाया है. टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने भी लेआउट स्वीकृति में इसे अनिवार्य दस्तावेज कर दिया है. खनन और क्रशर इकाइयों के लिए भी एनओसी जरूरी है, क्योंकि वन सीमा से 250 मीटर के भीतर किसी भी तरह की गतिविधि वन अपराध की श्रेणी में आती है
