वाहन फिटनेस कराने अब जाना पड़ेगा दूर

सीहोर। जिले सहित प्रदेश के कई जिलों के आरटीओ कार्यालयों में वाहन फिटनेस जांच और फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने की व्यवस्था अचानक बंद हो जाने से वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है. ऐसे में अब ऑटो, टैक्सी, बस और ट्रक जैसे व्यावसायिक वाहनों को फिटनेस कराने के लिए भोपाल का रुख करना पड़ेगा. लेकिन इसमें वाहन चालकों को खासी मशक्कत करना पड़ेगी.

खास बात यह है कि जिले के जावर, मेहतवाड़ा जैसी जगहों से भोपाल की दूरी 125 किमी से अधिक है। ऐसे में अब फिटनेस के लिए वाहन चालकों को आने-जाने में 150 किमी से ज्यादा की दूरी तय करना पड़ेगी. यह परेशानी अकेले सीहोर की नहीं बल्कि प्रदेश के 34 जिलों में भी हुई है. स्थिति यह है कि कई जिलों के वाहन चालकों को फिटनेस के लिए 40 किमी से लेकर 210 किमी तक की दूरी तय करनी पड़ रही है. गुना से भोपाल की दूरी लगभग 211 किमी हैं, जो प्रदेश में सबसे अधिक बताई जा रही है. गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने अब भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में ही फिटनेस सर्टिफिकेट की व्यवस्था रखी है।

परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि जिला स्तर पर फिटनेस व्यवस्था बंद करने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था स्पष्ट की जानी चाहिए थी। यदि जल्द ही नई नीति या स्थानीय समाधान लागू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में प्रदेशभर में यह समस्या और गंभीर रूप ले लेगी.

यदि किसी व्यावसायिक वाहन के पास वैध फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं पाया जाता है, तो 5,000 रुपए तक का चालान किया जा सकता है. ऐसे में वाहन चालकों के सामने दोहरी मजबूरी निर्मित हो गई है.या तो लंबी दूरी तय करके फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाएं या फिर जुर्माना भरें. इस व्यवस्था में बदलाव से वाहन चालक काफी मायूस हैं.

छोटे वाहन चालकों पर पड़ेगा सर्वाधिक असर

फिटनेस सर्टिफिकेट की वैधता केवल एक वर्ष होती है. ऐसे में वाहन चालकों को लंबी दूरी की यात्रा, ईंधन और समय का अतिरिक्त खर्च, रोजगार और कामकाज का नुकसान झेलना पड़ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों के ऑटो चालक और छोटे ट्रांसपोर्टर सबसे अधिक प्रभावित हैं. चांदबड़ निवासी सूरजसिंह ने बताया कि वे अपने लोडिंग ऑटो की फिटनेस बनवाने के लिए आरटीओ कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन वहां से उन्हें भोपाल जाने को कहा गया. ऐसी ही आपबीती अन्य कई वाहन चालकों ने बताते हुए पूर्व की तरह फिटनेस जांच जारी रखने की बात कही है.

इस कारण से बंद हुई जिला स्तर पर जांच

दरअसल, भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वाहन फिटनेस व्यवस्था को संभाग स्तर पर केंद्रीकृत करने की तैयारी की जा रही है. इसी क्रम में जिला स्तर पर फिटनेस कार्य बंद कर दिया गया है. भविष्य में यह जिम्मेदारी ऑटोमेटिक फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन (निजी एजेंसियों) को सौंपे जाने की योजना है, लेकिन नई व्यवस्था पूरी तरह लागू होने से पहले ही पुराना सिस्टम बंद कर दिए जाने से अव्यवस्था की स्थिति बन गई है.

समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं

– भारत सरकार ने ऑटोमेटिक फिटनेस स्टेशन का प्रावधान किया गया है। ग्वालियर और भोपाल सहित अन्य बड़े जिलों में पहले ही ऑटोमेटिक स्टेशन बन चुके हैं। फिलहाल सीहोर में ऐसा कोई सेटअप नहीं है। यह समस्या केवल सीहोर जिले की नहीं, बल्कि प्रदेश के कई जिलों की है। शासन स्तर पर इसके समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। वाहन चालक अपने नजदीकी किसी भी सेंटर पर जा सकता है जहां ऑटोमेटिक फिटनेस स्टेशन सेटअप हो।

रितेश तिवारी, जिला परिवहन अधिकारी सीहोर

Next Post

जिला चिकित्सालय परिसर में फिर अराजक हुई पार्किंग व्यवस्था

Tue Jan 20 , 2026
सतना : जिला चिकित्सालय की ओर जाने वाले मार्ग पर सुचारु यातायात के प्रयास भले ही समय समय पर किए जाते रहे हों लेकिन परिसर के अंदर अराजक हो चुकी व्यवस्था पर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं जा रहा है। नतीजतन अराजक हो चुकी पार्किंग व्यवस्था के चलते एक ओर एंबुलेंस […]

You May Like