रेलवे ने ट्रैक के आधुनिकीकरण और सुरक्षा क्षेत्र में लगाई लंबी छलांग, 2024-25 में 6,851 किमी ट्रैक का हुआ नवीनीकरण

नयी दिल्ली 18 जनवरी (वार्ता) देश में पिछले एक साल में रेलवे ट्रैकों के नवीनीकरण की दिशा में काफी तेज गति से काम हुआ है, जिसके कारण रेल सुरक्षा मजबूत हुई है।

रेलवे की ओर से रविवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में 6,851 किलोमीटर ट्रैक का नवीनीकरण पूरा हुआ है और मौजूदा समय में 7,500 ट्रैकों के नवीनीकरण का काम चल रहा है, जिसके वित्त वर्ष 2025-26 में पूरा होने का अनुमान है। इसके अलावा, 2026-27 के लिए 7,900 किमी ट्रैक का नवीनीकरण करने की योजना है।

रेलवे ने बताया है कि 2024-25 में, 7,161 थिक वेब स्विच और 1,704 वेल्डेबल कास्ट मैंगनीज स्टील (सीएमएस) क्रॉसिंग लगाए गए। वहीं, 2025-26 में, 8,000 से ज़्यादा थिक वेब स्विच और 3,000 से ज़्यादा वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग लगाए जाने की योजना है।

रेलवे ने बताया कि ट्रैक की स्थिरता बनाए रखने और राइड क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए ज़रूरी बैलास्ट की मशीनीकृत डीप स्क्रीनिंग लगातार की गई है। रेलवे के मुताबिक 2024-25 के दौरान, 7,442 ट्रैक किलोमीटर की डीप स्क्रीनिंग पूरी की गई, जबकि 2025-26 में 7,500 से ज़्यादा ट्रैक किलोमीटर में डीप स्क्रीनिंग किये जाएंगे। मशीनीकृत रखरखाव में मदद करने और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए रेलवे ने अपने ट्रैक मशीन बेड़े का काफी विस्तार किया है। वर्ष 2014 से अब तक 1,100 से ज़्यादा ट्रैक मशीनें खरीदी गई हैं, जिससे रेलवे नेटवर्क का रखरखाव तेज़ी से और ज़्यादा कुशलता से हो रहा है।

रेलवे ने बताया है कि पशुओं के ट्रेन की चपेट में आने और अनाधिकृत प्रवेश की घटनाओं को कम करने के लिए रेलवे ट्रैक के किनारे सेफ्टी फेंसिंग को प्राथमिकता पर लिया गया है, जिससे कुल मिलाकर सुरक्षा बढ़ी है। अब तक लगभग 15,000 किलोमीटर की फेंसिंग लगाई गई है, जिससे उन सेक्शनों पर सुरक्षा में सुधार हुआ है जहां ट्रेनें 110 किमी प्रति घंटे से ज़्यादा की गति से चलती हैं।

रेलवे ने कहा है कि वर्ष 2014 में 110 किमी प्रति घंटे और उससे ज़्यादा की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों के योग पटरियों की लंबाई 31,445 किलोमीटर (नेटवर्क का लगभग 40 प्रतिशत) थी, जो अब बढ़कर 84,244 किलोमीटर (नेटवर्क का लगभग 80 प्रतिशत) हो गयी।

 

 

 

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