तेहरान | ईरान में सख्त इंटरनेट प्रतिबंधों और देशव्यापी सुरक्षा घेराबंदी के बीच कैदियों को फांसी दिए जाने का एक विचलित करने वाला मामला सामने आया है। अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि पिछले दो हफ्तों (5 से 14 जनवरी) के भीतर ईरान की विभिन्न जेलों में कम से कम 52 कैदियों को मौत की सजा दी गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन सजाओं को उस समय अंजाम दिया गया जब देश में सूचनाओं के आदान-प्रदान पर पूरी तरह रोक लगी हुई थी। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि शासन ने इंटरनेट ब्लैकआउट का फायदा उठाकर इन सजाओं को दुनिया की नजरों से छिपाकर अंजाम दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के अलग-अलग प्रांतों की 42 जेलों में कैदियों को फांसी के फंदे पर लटकाया गया। संगठन का दावा है कि इनमें से अधिकांश मामलों की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई, जो अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मानकों का खुला उल्लंघन है। फांसी पाने वाले इन 52 व्यक्तियों में ज्यादातर हत्या और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों के दोषी बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वतंत्र मीडिया और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की अनुपस्थिति में यह सुनिश्चित करना असंभव है कि क्या इन कैदियों को निष्पक्ष सुनवाई और अपनी सफाई देने का उचित कानूनी अवसर मिला था।
ईरान में फांसी की बढ़ती दर और सूचनाओं पर कड़े पहरे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि बिना किसी सार्वजनिक विवरण के दी जा रही ये सजाएं मानवीय गरिमा के विरुद्ध हैं और वास्तविक आंकड़ा रिपोर्ट से कहीं अधिक हो सकता है। वैश्विक संस्थाओं ने ईरान सरकार से मौत की सजा के इस बढ़ते इस्तेमाल को तुरंत रोकने और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की जोरदार अपील की है। फिलहाल, शासन ने इन रिपोर्टों पर चुप्पी साध रखी है, जिससे ईरान की आंतरिक स्थिति और भी रहस्यमयी बनी हुई है।

