पाकिस्तान चुनाव आयोग का ऐतिहासिक एक्शन, संपत्ति का ब्यौरा न देने पर 159 सांसदों और विधायकों की सदस्यता निलंबित, शहबाज सरकार के सामने खड़ा हुआ बड़ा विधायी संकट

पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ECP) ने भ्रष्टाचार और पारदर्शिता के नियमों का उल्लंघन करने वाले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। नेशनल असेंबली, सीनेट और प्रांतीय विधानसभाओं के कुल 159 सदस्यों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इन सदस्यों ने चुनाव अधिनियम 2017 की धारा 137 के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी और अपने परिवार की संपत्ति तथा देनदारियों का अनिवार्य ब्यौरा जमा नहीं किया था। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 15 जनवरी की अंतिम चेतावनी के बावजूद विवरण न देने पर यह सख्त कदम उठाना पड़ा।

निलंबित होने वालों में नेशनल असेंबली के 32 सदस्य और 9 सीनेटर शामिल हैं, जिनमें सैयद अली मूसा गिलानी और खालिद मकबूल सिद्दीकी जैसे बड़े राजनीतिक चेहरे भी हैं। प्रांतीय स्तर पर पंजाब असेंबली से सबसे ज्यादा 50 विधायक निलंबित किए गए हैं, जबकि सिंध से 33 और खैबर पख्तूनख्वा से 28 विधायकों पर गाज गिरी है। इस कार्रवाई के बाद ये सभी सदस्य तब तक सदन की कार्यवाही में भाग नहीं ले सकेंगे, मतदान नहीं कर पाएंगे और न ही किसी विधायी प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे, जब तक वे अपनी वित्तीय घोषणाएं पूरी नहीं कर देते।

इतनी बड़ी संख्या में सांसदों और विधायकों के बाहर होने से पाकिस्तान की वर्तमान सरकार के सामने बहुमत साबित करने और कानून बनाने का बड़ा संकट पैदा हो गया है। नेशनल असेंबली में सदन की कुल सक्रिय शक्ति कम होने से विपक्षी दल अब किसी भी विधेयक को अटकाने या कोरम (एक-चौथाई उपस्थिति) की कमी का मुद्दा उठाकर सदन की कार्यवाही रुकवाने में सक्षम हो गए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस निलंबन ने पाकिस्तान के पहले से ही अस्थिर राजनीतिक समीकरणों को और अधिक उलझा दिया है, जिससे विधायी कामकाज पूरी तरह ठप पड़ सकता है।

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