बुधनी। कलेक्टर बालागुरू के ने ग्राम पान गुराडिय़ा स्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व की सारू-मारू की गुफाओं बौद्ध स्तूपों एवं शिलालेखों का अवलोकन किया और प्राचीन धरोहर के संरक्षण के संबंध में जानकारी लेते हुए कहा कि सारू-मारू की गुफाएं जिले की ऐतिहासिक पहचान हैं. गौरतलब है कि सारू-मारू की गुफाओं का संबंध तथागत गौतम बुद्ध के प्रमुख शिष्यों महामोद्गलायन और सारिपुत्र के काल से माना जाता है. यह स्थल सांची से 120 किमी दूर स्थित है. यहां प्राकृतिक गुफाओं के साथ-साथ अनेक बौद्ध स्तूप निर्मित है. गुफाओं में स्वस्तिक, त्रिरत्न एवं कलश जैसे बौद्ध प्रतीकों के भित्तिचित्र आज भी देखे जा सकते हैं, जो इस स्थल की धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाते हैं. इस स्थल का विशेष महत्व इस कारण भी है कि यहां मुख्य गुफा में सम्राट अशोक से संबंधित दो महत्वपूर्ण शिलालेख प्राप्त हुए हैं. इनमें से एक शिलालेख में अशोक के पुत्र महेंद्र की यात्रा का उल्लेख मिलता है, जबकि दूसरे शिलालेख से यह जानकारी मिलती है कि सम्राट अशोक ने विदिशा में निवास के दौरान इस स्थल की यात्रा की थी.
कलेक्टर बालागुरु के ने सारू-मारू की गुफाओं का किया निरीक्षण
