
उज्जैन। महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज ने मुख्यमंत्री, कलेक्टर व प्रशासक को पत्र लिखकर मांग की थी कि गर्भगृह में व्यवस्था बनाने के लिए केवल एक ही शासकीय पुजारी घनश्याम शर्मा को जाने दिया जाए। अन्य पुजारी व उनके प्रतिनिधियों को रोका जाना चाहिए।
इस पर महाकाल विद्वत परिषद और अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने पुजारियों के समर्थन में पत्र जारी कर कहा कि मंदिर समिति नियम तोडऩे वाले साधु-संतों से भी पालन करवाए। महंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा थी कि मंदिर में नियुक्त पुजारियों के प्रतिनिधियों की संख्या की लिखित जानकारी अखाड़ा परिषद को दे। उनका तर्क था कि प्रतिनिधियों के प्रवेश से गर्भगृह में अव्यवस्था फैलती है तथा बाहर खड़े श्रद्धालुओं के आम दर्शन में बाधा होती है। इस पर विद्वत परिषद ने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पद को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या केंद्र या राज्य सरकार ने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष होने का कोई प्रमाण पत्र रवींद्र पुरी महाराज से लिया है। प्रशासन इसकी जांच करें। क्योंकि 3 अखाड़ा रामा दल परिषद से बाहर होने से यह अधूरी है।
