शुद्ध पेयजल व्यवस्था बेपटरी: ननि में केमिस्ट-वालमेन के पद खाली, दूषित पानी पीने को मजबूर जनता

भोपाल। राजधानी में पानी नगर निगम के द्वारा शुद्ध पेयजल की समस्या दूर नहीं हो पा रही है. ङ्क्षजससे हमेशा से ही जनता के द्वारा शिकायतें मिलती रहती है. स्वच्छ पेयजल के लिए नगर निगम में केमिस्ट और फिल्टर ऑपरेटर नहीं हैं समय के साथ केमिस्ट और फिल्टर ऑपरेटर, ऑपरेटर, वाल मेन सेवानिवृत होतेे गए आज स्थिति यह है कि पानी की शुद्धता जांचने वाला एक भी योग्य कर्मचारी अधिकारी नहीं है. वहीं फिल्टर प्लांट पर ना ही लॉग बुक है. जिससे पानी के फिल्टर की जानकारी ही नहीं मिल पाती है, इसकी वजह से शहर में अशुद्ध पानी सप्लाई हो रही है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार भोपाल की अधिकतर जनता पानी अशुद्ध पी रही है उसका मुख्य कारण नगर निगम में कोई पानी की जांच करने वाला केमिस्ट, वालमेन सहित अन्य एैसे पद जो पानी की शुद्धता की जांच करने वाले सभी सेवानिवृत हो चुके हैं. उसके बाद नगर निगम का इन पदों पर उदासीन रवैया बना रहा है, और इन सभी पदों के लिए भर्ती नहीं की गई. पानी की जांच हो या सप्लाई का कार्य विनियमित कर्मचारियों की भर्ती कर उनसे कराया जाने लगा जो आज तक निरंतर जारी है. वहीं किसी भी उपभोक्ता के घर पर नगर निगम का कर्मचारी पानी की जांच करने वर्षो से नहीं गया। उपभोक्ता खुद ही नगर निगम में जाकर पानी की समस्या की शिकायत करे. अभी कुछ दिन पहले ही दूषित पानी की वजह से इंदौर में बड़ी घटना हो चुकी है. उसके बाद राजधानी में चार स्थानों से पानी के सेंपल लिए गए जो प्रदूषित पाए गए. अगर इन सभी पदों पर नगर निगम ने जल्द ही भर्ती नहीं की तो यहां भी इंदौर जैसी घटना की पुनरावृत्ति हो सकती है। क्या यहां के अधिकारी और नगर निगम के जनप्रतिनिधि बड़ी घटना घटित होने का इंतजार कर रहे हैं।

केमिस्ट के स्वीकृत लेकिन वर्षों से खाली

शहर की जनता को शुद्ध और स्वच्छ जल प्रदाय करने के लिए स्वीकृत है जो नगर निगम की चार लेब है बैरागढ़, बीएचईएल, सीएम हाउस के पास यार्डक्लब, पुलबोगदा। यहां पर चार केमिस्ट पदस्थ रहते थे जो शहर पानी की शुद्धता की जांच करते थे। यह सभी पद खाली हैँ।

12 पद फिल्टर, असिस्टेंट मीडिया ऑपरेटर

शहर को पानी की सप्लाई वाले स्थानों पर इनकी पदस्थापना की जाती थी. इनका कार्य पानी को शुद्ध करने के लिए क्लोरीन या ब्लीचिंग पाउडर को मिलाना था जो कि सही मात्रा में हो जिससे पानी 1.2 पार्ट पर मिलियन शुद्ध पानी जनता को मिलता रहे। जो वर्तमान में सभी पद खाली हैं। इन स्थानों पर सभी अयोग्य कार्य कर रहे हैं, जिससे पानी में क्लोरीन की मात्रा कम ज्यादा होती रहती है।

वॉल मेन के पद भी खाली

नगर निगम के सभी वार्डों के लिए एक वाल मेन स्वीकृत था जो जल प्रदाय के दौरान जनता के घरों में जाकर पानी की शुद्धता की जांच करता था। अगर पानी में क्लोरीन की मात्रा अधिक कम है यहा अशुद्ध आ रहा है तो इसकी जानकारी केमिस्ट और मीडिया ऑपरेटर को दी जाती थी साथ ही वहां से पानी का सेंपल लेकर जांच के लिए लेब में भेजा जाता था। लेकिन अब कार्य पूरी तरह से बंद है जिससे जनता के घर पहूंचने वाले जल शुद्धता की जांच ही नहीं हो पाती है।

एक केमिस्ट पीएचई विभाग से

नगर निगम में पीएचई विभाग से एक केमिस्ट हैं मनोज निगम. जिन्हें नगर निगम में मर्ज किया गया है वर्तमान में विधानसभा के सामने स्थित पीएचई के कार्यालय पर बैठते हैं वहां पर पानी शद्धीकरण की लेब है। नगर निगम के किसी भी लेब पर कार्य नहीं देखते हैं। जबकि उनको नगर निगम से वेतन मिलता है।

जलप्रदाय की मात्रा के लिए लॉग बुक भी नहीं

जानकारी के अनुसार नगर निगम के किसी पंप हाउस पर लॉग बुक नहीं है जिससे पानी के सप्लाई और फिल्टर की जानकारी विभाग को मिल पाती है। लॉग बुक में पानी की सभी जानकारी इंद्राज की जाती थी जैसे कितना मिलियन क्यूबिक लीटर पानी फिल्टर हुआ ओर कितन कचरा निकल ओर कितना पानी शुद्ध होकर जनता का सप्लाई किया गया. इस वजह से पानी के फिल्टर की जानकारी नहीं मिल पाती है.


इनका कहना है

शासन स्तर पर बात हो रही है, हम बातचीत कर रहे हैं, जल्द ही प्रकिया शुरू होगी.

मालती राय, महापौर, नगर निगम भोपाल

नगर निगम में पेयजल का संघरण और संचालन सही तरीके से नहीं हो रहा है क्लोरीन की जांच भी नहीं हो पा रही है. इंदौर की घटना के बाद भोपाल में पानी के संपल लिए गए सभी फेल पाए गए।

शबिस्ता जकी, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम भोपाल


 

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