नयी दिल्ली, 14 जनवरी (वार्ता) भारतीय प्रकाशन उद्योग में तेजी से हो रहे बदलावों को समझने के लिए भारतीय प्रकाशक संघ (एफआईपी) और नील्सन आईक्यू बुकडेटा संयुक्त रूप से इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट का तीसरा अंक जारी करेंगे। यह रिपोर्ट प्रिंट किताबों के साथ-साथ डिजिटल और ऑडियोबुक पब्लिशिंग में हो रहे विकास और उनके आर्थिक योगदान के आंकड़ा आधारित विश्लेषण प्रस्तुत करेगी।
इस रिपोर्ट की घोषणा विश्व पुस्तक मेला में मीडिया से बातचीत में हुयी। रिपोर्ट के अगस्त–सितंबर 2026 तक जारी होने की संभावना है।
एफआईपी के उपाध्यक्ष प्रणव गुप्ता ने बताया कि रिपोर्ट का यह तीसरा संस्करण पहले की रिपोर्टों से काफी अलग होगा। उन्होंने कहा कि अब तक के अध्ययनों में मुख्य रूप से प्रिंट पब्लिशिंग पर ध्यान दिया गया था, लेकिन यह रिपोर्ट बदलते समय के अनुरूप होगी।
उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट भारतीय प्रिंट बुक मार्केट के साथ-साथ डिजिटल पब्लिशिंग के सभी स्वरूपों—ई-बुक और ऑडियोबुक—को कवर करेगी। इसके साथ ही पहली बार यह भी आकलन किया जाएगा कि डिजिटल पब्लिशिंग भारतीय अर्थव्यवस्था में कितना योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि नया संस्करण प्रिंट और डिजिटल दोनों प्रारूपों का एक साथ अध्ययन करेगा, जिससे यह समझने में मदद मिलेगी कि भारतीय प्रकाशन उद्योग किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
नील्सन आईक्यू बुकडेटा इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विक्रांत माथुर ने कहा कि पहले के संस्करणों में कोविड-19 का प्रकाशन उद्योग पर प्रभाव, शिक्षा क्षेत्र का विस्तार, स्कूल बोर्डों में नामांकन, आयात-निर्यात, कॉपीराइट और पाइरेसी जैसी चुनौतियों का विश्लेषण किया गया था। उन्होंने कहा कि अब हमारा उद्देश्य पांच साल बाद बाजार की स्थिति को दोबारा समझना है। हम यह जानना चाहते हैं कि डिजिटल पब्लिशिंग कितनी तेजी से बढ़ रही है, उसका आकार क्या है और स्कूल, उच्च शिक्षा तथा ट्रेड पब्लिशिंग जैसे अलग-अलग क्षेत्रों पर उसका क्या प्रभाव पड़ रहा है।
श्री माथुर ने यह भी बताया कि इस रिपोर्ट में प्रकाशन उद्योग की तुलना फिल्म और संगीत जैसे अन्य मनोरंजन क्षेत्रों से की जाएगी, ताकि इसके आर्थिक योगदान और विकास को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
