5 साल की उम्र में शुरू की साधना, 500 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे, जानें शिवकुमार शर्मा की अनसुनी कहानी

शिवकुमार शर्मा ने संतूर को भारतीय शास्त्रीय संगीत की मुख्यधारा में स्थापित कर वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने शिव-हरि जोड़ी के जरिए फिल्मों में अमर धुनें रचीं।

भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले महान संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा का नाम संगीत प्रेमियों के लिए किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उन्होंने न सिर्फ संतूर को शास्त्रीय संगीत की मुख्यधारा में स्थापित किया, बल्कि अपनी साधना और प्रयोगों से इसे वैश्विक पहचान भी दिलाई। ‘मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियां’, ‘देखा एक ख्वाब’ और ‘जादू तेरी नजर’ जैसे सदाबहार गीतों में उनकी संगीत छाप आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है।

पंडित शिवकुमार शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1938 को जम्मू में हुआ था। उनके पिता पंडित उमा दत्त शर्मा स्वयं संगीत प्रेमी थे और उन्होंने ही शिवकुमार को बहुत छोटी उम्र में संगीत की शिक्षा देनी शुरू की। महज 5 साल की उम्र में तबला और गायन सीखने वाले शिवकुमार ने 13 साल की उम्र में संतूर को अपना मुख्य वाद्य बना लिया। उस दौर में संतूर को शास्त्रीय मंचों पर गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन शिवकुमार शर्मा ने इसे अपनी तपस्या और अभ्यास से प्रतिष्ठा दिलाई।

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