इंदौर:रेस्क्यू किए गए घायल तेंदुए को लेकर वन विभाग और चिड़ियाघर प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति बन गई. तेंदुए का सफल रेस्क्यू करने के बाद वन विभाग की टीम उसे इलाज के लिए कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय लेकर पहुंची, लेकिन वहां मौजूद स्टाफ ने न केवल तेंदुए को रखने से, बल्कि उसका इलाज करने से भी इनकार कर दिया. इस पर रालामंडल के फॉरेस्ट एसडीओ भड़क उठे और काफी देर तक विवाद की स्थिति बनी रही.
चिड़ियाघर से सहयोग नहीं मिलने के बाद वन विभाग की रेस्क्यू टीम को घायल तेंदुए को वापस रालामंडल ले जाना पड़ा. तेंदुआ रालामंडल में ही रखा गया है, जहां वन विभाग के स्टाफ ने रातभर उस पर निगरानी रखी. विभागीय अधिकारियों के अनुसार तेंदुए की मेडिकल जांच और इलाज के लिए उसे महू स्थित वेटरनरी हॉस्पिटल ले जाया जाएगा. रालामंडल एसडीओ कटारा ने बताया कि घायल या बीमार वन्यजीवों के इलाज और अस्थायी रखरखाव के लिए चिड़ियाघर प्रबंधन वन विभाग से अधिकृत है, लेकिन जब भी किसी वन्यजीव, विशेषकर तेंदुए को इलाज के लिए जू लाया जाता है, तो स्टाफ की ओर से अक्सर किसी न किसी कारण का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है.
उस भी यही स्थिति बनी, जिसके चलते घायल तेंदुए को बिना इलाज लौटाना पड़ा. इस पूरे मामले में चिड़ियाघर प्रबंधन की ओर से सफाई दी गई. जू में पदस्थ राकेश यादव ने बताया कि चिड़ियाघर में पदस्थ वाइल्ड एनिमल स्पेशलिस्ट डॉक्टर के परिवार में निधन हो गया है, जिस कारण वे अवकाश पर हैं. इसी वजह से तेंदुए का इलाज वहां संभव नहीं हो सका. इधर, इंदौर वनमंडल के डीएफओ का कहना है कि एक ओर जिले में तेंदुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर बिना मुंडेर वाले कुएं, खेतों में जंगली सूअर से बचाव के लिए लगाए जाने वाले फंदे और खुले बिजली के तार तेंदुओं सहित अन्य वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं. इसी तरह की परिस्थितियों में तेंदुओं के घायल होने की घटनाएं सामने आ रही हैं.
