नटेरन: नटेरन जनपद पंचायत में सहायक लेखा अधिकारी (एएओ) के कार्यप्रणाली को लेकर सरपंचों के एक वर्ग ने असंतोष जताया है. सरपंच संघ अध्यक्ष भूरा धाकड़ के नेतृत्व में कुछ सरपंचों ने आरोप लगाया है कि विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत किए गए कार्यों के भुगतान में अनावश्यक देरी हो रही है, जिससे मजदूरों और हितग्राहियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
सरपंच संघ का कहना है कि मनरेगा सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं में कई पंचायतों के भुगतान पिछले दो वर्षों से लंबित हैं. आरोप है कि नलकूप निर्माण, तालाब, एक बगिया मां के नाम जैसी योजनाओं में कार्य पूर्ण होने, मस्टररोल और आवश्यक दस्तावेज तैयार होने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया. सरपंचों ने यह भी दावा किया कि कुछ पुराने बिल लंबित रहते हुए बाद की तारीखों के बिलों का भुगतान किया गया, जिससे असमानता की स्थिति बनी.
इस संबंध में सरपंच संघ ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है. संघ अध्यक्ष ने कहा कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो वे लिखित शिकायत देने के साथ ही धरना-प्रदर्शन और अन्य वैधानिक कदम उठाने पर विचार करेंगे. सरपंचों का कहना है कि भुगतान में देरी का सीधा असर ग्रामीण मजदूरों और गरीब हितग्राहियों पर पड़ रहा है.वहीं, इन आरोपों पर सहायक लेखा अधिकारी सुरेश मेहरा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि भुगतान में देरी का मुख्य कारण सीमित आवंटन है.
उनके अनुसार जिन पंचायतों के प्रकरण तकनीकी रूप से पूर्ण और नियमों के अनुरूप पाए गए, उन्हीं का भुगतान किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध बजट के भीतर सभी पंचायतों को एक साथ भुगतान करना संभव नहीं हो पाता.फिलहाल, यह मामला जनपद पंचायत और जिला प्रशासन के संज्ञान में है. अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन स्तर पर जांच और आवश्यक कार्रवाई किस तरह की जाती है, ताकि भुगतान संबंधी स्थिति स्पष्ट हो सके और प्रभावित हितग्राहियों को राहत मिल सके.
