ब्यावरा: राजगढ़ जिले में औषद्यीय फसल चियासीड का रकबा एकाएक बढक़र गत वर्ष की तुलना में दोगुना जा पहुंचा है. कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली इस औषद्यीय फसल के प्रति जिले में रुझान बढ़ा है.जानकारी के अनुसार औषद्यीय फसल चियासीड का रकबा जिले में गत वर्ष करीब 100 हैक्टर के आसपास था जो इस बार लगभग 250 हैक्टर पर जा पहुंचा है, यानि रकबे में दोगुना बढ़ोत्तरी हुई है जो यह दर्शाता है कि इस औषद्यीय फसल के प्रति रुझान बढ़ा है. चियासीड के साथ ही औषद्यीय फसल किनोवा का भी रकबा बड़ा है. इन औषद्यीय फसल का उपयोग विभिन्न प्रकार की दवाईयों में उपयोग किया जाता है, इससे इनकी डिमांड भी बढऩे लगी है.
एक बीघा में एक लाख तक का मुनाफा
जानकारों के अनसार चियासीड से एक बीघा में एक लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है. वर्तमान में चियासीड 15 से 20 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिकता है या फिर इससे अधिक भी यह बिक जाता है.
नरसिंहगढ़ तहसील में तेजी से बढ़ा रकबा
उद्यानिकी विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार नरसिंहगढ़ तहसील में चियासीड का रकबा काफी तेजी के साथ बड़ा है. तहसील के ग्राम अमलार, पीपल्या रसोड़ा, गोपालपुरा में काफी मात्रा में चियासीड का उत्पादन होना सामने आया है. तहसील में गत वर्ष चियासीड का रकबा 200 बीघा के आसपास था जो इस बार 400 बीघा के लगभग आ गया है. कुरावर क्षेत्र के ग्राम झुमका के समीप भी चियासीड की बोवनी की है.
नीमच में होती है मंडी
चियासीड का उत्पादन एक बीघा में 3 से 4 क्विंटल तक होना बताया जाता है, चियासीड की फसल 90 से 100 दिन में तैयार हो जाती है. चीयासीड की बिक्री के लिए ग्रामीणजन को नीमच जाना होता है, नीमच में इसकी मंडी होती है.
जिले में कई जगह चियासीड की खेती
उद्यानिकी विभाग के अनुसार जिले में नरसिंहगढ़, राजगढ़, सारंगपुर, ब्यावरा तहसील में औषद्यीय फसल चियासीड का रकबा इस वर्ष बड़ा है, उद्यानिकी विभाग के जिला अधिकारी डॉ. वी.एस. मीना के अनुसार जिले में इस बार लगभग 250 हैक्टर में औषद्यीय फसल चियासीड का रकबा पहुंचा है, जो कि गत वर्ष की तुलना में दोगुना है
