बुंदेली रंग में रंगा खुरई: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ऐतिहासिक रोड शो, 6 किमी तक उमड़ा जनसैलाब

सागर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खुरई आगमन पर बुन्देली परंपरा के अनुसार आत्मीय स्वागत हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जनसमूह के बीच पहुंचकर ऐतिहासिक रोड शो किया। मुख्यमंत्री आगमन को लेकर नगर सहित आसपास उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला।

6 किलोमीटर लंबा रोड शो खुरई स्टेडियम से प्रारंभ होकर खुरई के मुख्य बाजार की सड़कों से गुजरते हुए कृषि मंडी के निकट स्थित सभास्थल पर समाप्त हुआ। मुख्यमंत्री के स्वागत में नागरिकों ने अनोखे और आकर्षक तरीकों से अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। स्कूली बच्चों ने पुष्पवर्षा कर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया और मलखंभ के माध्यम से विभिन्न आकर्षक एवं मनोहारी आकृतियों का प्रदर्शन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कई स्थानों पर लोग जेसीबी मशीन पर चढ़कर पुष्पवर्षा कर रहे थे, वहीं अनेक नागरिक घरों की छतों पर चढ़कर फूलों की वर्षा करते हुए दिखाई दिए।रोड शो के मार्ग पर लगभग 151 स्वागत द्वारों पर विभिन्न पारंपरिक लोकनृत्य, ढोल-नगाड़ों, शेर का रूप धारण करके प्रस्तुति और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया गया। नगरवासियों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों ने इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे मार्ग पर मुख्यमंत्री का स्वागत है जैसे नारों से वातावरण गूंजता रहा। स्वागत स्थलों को रंग-बिरंगे तोरण द्वारों, रंगोली और फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा नगर एक उत्सव के रूप में दिखाई दे रहा था। मुख्यमंत्री का स्वागत बैण्ड-बाजे और पुष्पगुच्छ भेंट करके किया गया। मनमोहक रंगोली से मार्ग को सजाया गया और आम के तोरण द्वार लगाए गए। साथ ही, निवासियों ने दीप जलाए, कलश रखे और आरती उतारी।हेलीपैड से कार्यक्रम स्थल तक रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री का बुन्देली वाद्ययंत्रों की मधुर गूंज से स्वागत किया गया। बुंदेली संस्कृति की झलक दिखाते हुए ढोल-नगाड़ों, मांगलिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच हजारों की संख्या में एकत्रित जनसमुदाय ने फूलों की वर्षा कर मुख्यमंत्री का जोरदार स्वागत किया। महिलाओं एवं पुरुष कलाकारों की टोलियों ने पारंपरिक वेशभूषा में बुंदेली नृत्य राई, बधाई, दिवारी की जीवंत प्रस्तुतियां दीं, जो उत्साह एवं आकर्षण का प्रतीक बनीं।

रोड शो के दौरान लाड़ली बहना योजना की लाभार्थी बहनों ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उन्होंने सिर पर आम के पत्ते एवं नारियल सजाए, कलश रखकर अभिनंदन किया, आरती उतारी, तिलक लगाया एवं फूल बरसाए। यह परंपरा भारतीय संस्कृति में अतिथि देवो भवः की भावना को दर्शाती है।

कार्यक्रम के दौरान बुंदेलखंड की लोक परंपरा रमतूला दुलदुल घोड़ी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। पारंपरिक ढपला, मंजीरा एवं ढोल की थाप पर दुलदुल घोड़ी के साथ कलाकारों ने मनमोहक प्रदर्शन किया, जिसने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। स्थानीय कलाकारों ने रंग-बिरंगे कपड़ों से सजी दुलदुल घोड़ियों पर सवार होकर रमतूला शैली में नृत्य किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड की इस गर्मजोशी और स्नेह ने उन्हें ऊर्जा से भर दिया है। उन्होंने कहा, बुंदेलखंड की यह मिट्टी वीरों की मिट्टी है और यहां के लोगों का प्यार मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान है।

इस अवसर पर प्रदेश के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत, सांसद श्रीमती लता वानखेड़े, पूर्व मंत्री एवं विधायक भूपेन्द्र सिंह, विधायक शैलेंद्र जैन, जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी और बड़ी तादाद में आमजन मौजूद थे।

Next Post

सोमनाथ मंदिर के विध्वंस को 1000 वर्ष पूर्ण होने पर  शिवालयों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया ओम नमः शिवाय का जाप 

Sat Jan 10 , 2026
अशोक नगर। मुगल काल में आक्रांता शासक द्वारा भारत के प्राचीन सनातन हिंदू धर्म के मंदिरों पर क्रूरता पूर्वक आक्रमण कर उन्हें नष्ट किया गया इन्हीं में से एक गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर पर हुए ऐतिहासिक आक्रमण को 1000 वर्ष पूर्ण होने, मंदिर के पुनः जीर्णोद्धार के करीब 80 […]

You May Like