
झाबुआ। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र, भोपाल में पेसा कानून (पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्र विस्तार अधिनियम) के क्रियान्वयन को लेकर राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री प्रहलाद पटेल ने झाबुआ जिले के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पेसा एक्ट के सफल क्रियान्वयन के लिए जनजातीय कल्याण विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि झाबुआ सहित प्रदेश के अन्य वनांचल क्षेत्रों में पेसा कानून के अंतर्गत लगातार सराहनीय कार्य किए जा रहे हैं, जो जनजातीय स्वशासन की भावना को मजबूत कर रहे हैं।
उन्होंने पेसा कानून के अंतर्गत जनजातीय समुदाय को मिले पारंपरिक अधिकारों को धरातल पर उतारने में पेसा जिला समन्वयक, ब्लॉक समन्वयक एवं मोबिलाइज़र की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण एवं सराहनीय बताया। सभी विभागों के बीच समन्वय से प्राप्त सकारात्मक परिणामों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मंत्री श्री पटेल ने जिला पंचायत टीम एवं पेसा से जुड़े समस्त कार्यदल को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
जिला समन्वयक पेसा एक्ट गौरसिंह कटारा ने बताया कि समीक्षा बैठक में पेसा नियमों से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा एवं मूल्यांकन किया गया। इस दौरान प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट के आधार पर झाबुआ जिला लगभग सभी मापदंडों पर प्रदेश में अव्वल रहा। बैठक में बताया गया कि झाबुआ जिले में अब तक 1073 ग्राम सभाओं का गठन पूर्ण किया जा चुका है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के चलते झाबुआ जिले को पेसा कानून के प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन का मॉडल जिला घोषित किया गया।
उन्होंने बताया कि झाबुआ जिले में पेसा कानून के तहत गठित शांति एवं विवाद निवारण समिति, वन संसाधन योजना एवं नियंत्रण समिति तथा सहयोगिनी मातृ समितियों को निरंतर सक्रिय किया जा रहा है। इन समितियों के माध्यम से ग्राम स्तर पर विवाद समाधान, सामुदायिक सहभागिता और पारंपरिक स्वशासन को मजबूती मिली है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।
ग्राम सभाओं को प्राप्त अधिकारों के अंतर्गत गौण वनोपज के क्षेत्र में भी झाबुआ जिले ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। तेंदूपत्ता संग्रहण को लेकर 18 प्रस्ताव ग्राम सभाओं द्वारा पारित कराए जा चुके हैं, जिन्हें विभागीय प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया गया है। इससे जनजातीय समुदाय को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ठोस लाभ मिलने की संभावना है।
झाबुआ जिले की यह उपलब्धि न केवल पेसा कानून के सफल क्रियान्वयन का उदाहरण है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणास्रोत एवं अनुकरणीय मॉडल के रूप में सामने आई है।
बैठक में पेसा अधिनियम लागू करने वाले प्रदेश के 20 जिलों के जिला समन्वयक, पंचायत राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
