जबलपुर: नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज कराने आ रहे मरीजों को एमआरआई की जांच कराने के लिए तीन से चार माह का और इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि जहां पर मशीन स्थापित होनी है वहां सिविल वर्क अभी भी किया जा रहा है। और इस काम को पूरा होने में 3 से 4 माह का समय लगना बताया जा रहा है। अब आलम ये है कि मरीजों को मजबूरी में निजी केंद्रों में एमआरआई के लिए जाना पड़ रहा है।
मेडिकल अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार नई एमआरआई मशीन को स्थापित करने के लिए एक विशेष तकनीकी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। इसके लिए विशेष कक्ष का निर्माण, रेडिएशन सुरक्षा और मैग्नेटिक फील्ड को नियंत्रित करने के लिए निर्माण कार्य किया जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कंपनी के इंजीनियरों द्वारा मशीन को असेंबल और टेस्ट किया जाएगा, जिसमें समय लगना तय है।
निजी केंद्रों में जाने से बिगड़ती है आर्थिक स्थिति
विदित हो कि मेडिकल कॉलेज में एमआरआई सुविधा ठप्प होने का सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर उन मरीजों पर पड़ रहा है, जिनके पास कोई कार्ड नहीं है। ऐसे में मजबूरन इन मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटर्स पर इसके लिए 5,000 से 12,000 तक देकर जांच कराना पड़ रही है। जिससे उन्हें आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है।
इनका कहना है
–निर्माण कार्य के सेंटर से हमने मरीजों की सुविधा के लिए एमओयू किया है। जल्द से जल्द काम पूरा करने के लिए संबंधित विभाग को निर्देशित किया गया है। सीटी स्कैन की जांच फिलहाल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हो रही है।
-प्रो. नवनीत सक्सेना, डीन मेडिकल कॉलेज ,जबलपुर।
