
भोपाल। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने कहा कि इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण 18 नागरिकों की मौत ने प्रदेश की शासन-प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह त्रासदी केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं की पोल खोलती है। सुरक्षित पानी जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने में विफल सिस्टम अब बयानबाज़ी के सहारे जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करता दिख रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में खण्डवा से भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का यह कहना कि सब कुछ सरकार ही क्यों करे, जनता की भी ज़िम्मेदारी बनती है, राजनीतिक बयान भर नहीं, बल्कि संवेदनहीनता का प्रतीक माना जा रहा है। जब नागरिक कर, शुल्क और वोट के ज़रिये सरकार को अधिकार सौंपते हैं, तब जीवन रक्षक सेवाओं की जवाबदेही भी सरकार की ही होती है।
मौतों के बाद भी जवाबदेही तय न होना और जिम्मेदारी जनता पर डालना पीड़ित परिवारों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। अब मांग उठ रही है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, प्रशासनिक लापरवाही की निष्पक्ष जांच हो और प्रभावित परिवारों को न्याय व मुआवजा मिले।
